राजभाषा क्या है? अर्थ, परिभाषा, स्वरूप एवं विशेषताएँ (Complete Guide 2026)

राजभाषा का तात्पर्य उस अधिकृत भाषा से है जिसे किसी देश या राज्य द्वारा अपने प्रशासनिक, विधायी और न्यायिक कार्यों के लिए आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जाता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में, संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार, देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है।

यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि हिंदी भारत की संवैधानिक 'राजभाषा' (कामकाज की भाषा) है, न कि 'राष्ट्रभाषा'। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र के बीच संचार और समन्वय को सुगम बनाना है।

    राजभाषा किसे कहते हैं

    राजभाषा किसी देश या राज्य की वह भाषा होती है जो सभी राजकीय प्रयोजनों में प्रयुक्त होती है। राजभाषा अर्थात राज-काज की भाषा, शासकीय काम-काज की भाषा। अतः प्रशासन की भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया जाता है।

    साधारण शब्दों में कहा जाये तो 'राजभाषा' वह भाषा है जो सरकारी कार्यालयों में प्रयुक्त होती है तथा सम्पूर्ण व्यवस्था इसमे अपने क्रियाकलाप करती है।

    राजभाषा किसे कहते हैं

    राजभाषा का अर्थ और परिभाषा

    राजभाषा की परिभाषा आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा के अनुसार, 

    "न्यायपालिका क्षेत्रों में जिस भाषा का प्रयोग किया जाता है, उसी कार्यालयी भाषा भी कहलाती है।" 

    अतः राजभाषा को शासक की भाषा के अर्थ में भी लिया जा सकता है। केंद्र की राजभाषा को संघभाषा भी कहा जाता है। राजभाषा का बहुत महत्व होता है। 

    राजभाषा का प्रयोग मुख्य रूप से चार क्षेत्रों में किया जाता है :-

    1. शिक्षा क्षेत्र
    2. शासन
    3. न्यायपालिका
    4. जनसंचार

    हिंदी में 'राजभाषा' शब्द अंग्रेजी के 'आफिशियल लैंग्वेज' (Official Language) के पर्याय के रूप में प्रयुक्त होता है। इस शब्द का प्रयोग क़ानूनी तौर पर स्वतंत्र भारत के संविधान में सर्वप्रथम किया गया। 

    भारत के संविधान, अध्याय '17', अनुच्छेद '343' के अनुसार 'संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी होगी यहाँ संघ की राजभाषा से तात्पर्य संघ के विधानांग, कार्याग तथा न्यायांग आदि तीन प्रमुख अंगो के कार्यकलाप में प्रयुक्त भाषा से है।

    राजभाषा की परिभाषाएं

    विभिन्न विद्वानों ने निम्नलिखित रूप में राजभाषा को परिभाषित (Official Language meaning in Hindi) किया है-

    डॉ० हरिमोहन के अनुसार- "राजभाषा का सीधा अर्थ है, जिस भाषा में राज-काज किया जाता है | केंद्रीय तथा प्रादेशिक सरकारों के द्वारा पत्र-व्यव्हार, सरकारी कार्य और लिखा-पढ़ी के कामों में इसी भाषा का व्यवहार किया जाता है |"

    रामचंद्र वर्मा के अनुसार- "किसी देश में प्रचलित वह भाषा जिसका प्रयोग प्रायः सभी राजकीय कार्यों और न्यायालयों में होता है।"

    डॉ० भोलानाथ तिवारी के अनुसार-: "राज्यभाषा 'आफिशियल लैंग्वेज' अंग्रेजी में ऐसी भाषा जिसका प्रयोग राज्य के कार्यों में होता है"

    डॉ० श्याम सुंदर दास के अनुसार- "वह भाषा जो सरकारी कामकाज तथा न्यायालयों के लिए स्वीकृत हो।

    डॉ० संजीव जैन के अनुसार- "राजभाषा वह भाषा है जिसका प्रयोग केंद्रीय सरकार अपने कार्य व्यापार तथा अन्य प्रदेशों के साथ सरकारी कामकाज या पत्र-व्यवहार के लिए करती है।"

    राजभाषा के रूप में हिन्दी का विकास

    📌अशोक के समय पालि राजभाषा थी।

    📌  राजस्थान में 11वीं–15वीं शताब्दी के बीच हिन्दी-मिश्रित संस्कृत राजभाषा के रूप में प्रयुक्त होती थी।

    📌मुहम्मद गोरी से अकबर तक हिन्दी राजभाषा रही तथा अकबर के समय टोडरमल के निर्देश पर फ़ारसी को राजभाषा बनाया गया।

    📌ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने 1833 तक फ़ारसी को राजभाषा बनाए रखा।

    📌लॉर्ड मैकॉले के प्रयासों से अंग्रेज़ी राजभाषा बनी।

    📌 राष्ट्रीय चेतना के साथ हिन्दी को राजभाषा/राष्ट्रभाषा बनाने की मांग बढ़ी।

    📌पं. मदनमोहन मालवीय के प्रयासों से 1901 में हिन्दी को उर्दू के समान अधिकार मिला।

    📌हिन्दी नाम का सुझाव सबसे पहले मालवीय जी ने दिया।

    📌गोपाल स्वामी आयंगर ने प्रस्ताव रखा; जिस हेतु 4 सितम्बर 1949 को हिन्दी को राजभाषा का दर्जा मिला।

    राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति

    ◼ अनुच्छेद 343: संघ की राजभाषा हिन्दी तथा लिपि देवनागरी है।

    ◼अनुच्छेद 344: राजभाषा आयोग और संसदीय समिति का प्रावधान।

    ◼ अनुच्छेद 344(1): 7 जून 1955 को राजभाषा आयोग का गठन।

    ◼ अनुच्छेद 344(4): आयोग की सिफारिशों की समीक्षा हेतु 30 सदस्यीय समिति (20 लोकसभा + 10 राज्यसभा)।

    ◼ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष बाल गंगाधर खरे थे। आयोग की प्रथम बैठक 15 जुलाई, 1955 को हुई थी।

    ◼ अनुच्छेद 345: राज्य अपनी एक या अधिक भाषाओं/हिन्दी को शासकीय कार्य हेतु अपना सकते हैं।

    ◼ अनुच्छेद 346: राज्यों व संघ के बीच संचार की भाषा संघ की राजभाषा होगी।

    ◼ अनुच्छेद 347: किसी क्षेत्रीय भाषा के संबंध में विशेष प्रावधान।

    ◼ अनुच्छेद 348: उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय व विधेयकों की भाषा।

    ◼ अनुच्छेद 349: भाषा सम्बन्धी विधि निर्माण की विशेष प्रक्रिया।

    ◼ अनुच्छेद 350: शिकायतों में प्रयोग की भाषा का प्रावधान।

    ◼ अनुच्छेद 350(क): प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में उपलब्ध कराने का प्रावधान।

    ◼ अनुच्छेद 350(ख): भाषायी अल्पसंख्यकों हेतु विशेष अधिकारी की नियुक्ति।

    ◼ अनुच्छेद 351: हिन्दी के विकास और प्रसार का निर्देश।

    ◼ संविधान की अष्टम अनुसूची (अनुच्छेद 344(1) एवं 351) में 22 भाषाएँ शामिल हैं।

      भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची की भाषाएं

    भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाएं सम्मिलित हैं । संविधान के निर्माण के समय आरम्भ में इस अनुसूची में केवल 14 भाषाओं को स्थान दिया गया था, जो निम्नलिखित हैं-

    • असमिया और बांग्ला
    • गुजरातीहिन्दी और कन्नड़
    • कश्मीरीमलयालम और मराठी
    • उड़ियापंजाबी और संस्कृत
    • तमिलतेलुगू और उर्दू

    अनुसूची में हुए महत्वपूर्ण संशोधन -

    समय के साथ विभिन्न संशोधनों के माध्यम से अन्य भाषाओं को भी इस सूची में जोड़ा गया-

    1. 21वां संशोधन (1967): इसके अंतर्गत सिन्धी भाषा को 15वीं भाषा के रूप में शामिल किया गया।
    2. 71वां संशोधन (1992): इस संशोधन द्वारा कोंकणीमणिपुरी और नेपाली भाषाओं को जोड़ा गया।
    3. 92वां संशोधन (2003): इसके माध्यम से बोडोडोगरीमैथिली और संथाली भाषाओं को सम्मिलित किया गया।

    राजभाषा हिंदी और अंग्रेजी की स्थिति -

    भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसारसंघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में लिखित हिन्दी है  इसके साथ हीसंविधान के अनुच्छेद 351 में हिन्दी भाषा के विकास और प्रसार के लिए विशेष निर्देशों का उल्लेख किया गया है 

    संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 120 और 348) के अनुसार, भारतीय संसद और न्यायपालिका में हिंदी के साथ अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति दी गई है। मूल योजना के तहत वर्ष 1965 तक समस्त राजकीय कार्यों को पूर्णतः हिंदी में परिवर्तित किया जाना था, किंतु प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से यह लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सका।

    परिणामस्वरूप, राजभाषा अधिनियम (1963 एवं 1967) के माध्यम से अंग्रेजी को अनिश्चित काल के लिए हिंदी के साथ सह-राजभाषा के रूप में बरकरार रखा गया। वर्तमान में भारत के केंद्र सरकार के कामकाज में हिंदी और अंग्रेजी दोनों का आधिकारिक रूप से उपयोग किया जाता है।

    राजभाषा हिंदी pdf

    राजभाषा और राष्ट्रभाषा में मुख्य अंतर

    क्र.सं. राजभाषा (Official Language) राष्ट्रभाषा (National Language)
    1. राजभाषा एक संवैधानिक शब्द है, जिसे कानून द्वारा मान्यता दी जाती है। राष्ट्रभाषा स्वाभाविक रूप से सृजित शब्द है, जो जनमानस से उपजता है।
    2. यह मुख्य रूप से प्रशासन और राज-काज की भाषा है। यह जनता की भाषा है और पूरे राष्ट्र की पहचान होती है।
    3. इसमें केवल प्रशासनिक और आधिकारिक अभिव्यक्ति होती है। इसमें समस्त राष्ट्रीय और सांस्कृतिक तत्वों की अभिव्यक्ति होती है।
    4. इसकी शब्दावली तकनीकी और सीमित होती है। इसकी शब्दावली अत्यंत विस्तृत और लचीली होती है।
    5. राजभाषा पूरी तरह से सरकारी नियमों और व्याकरण में बँधी होती है। राष्ट्रभाषा स्वतंत्र और मुक्त प्रकृति की होती है।
    6. इसमें शब्दों का चयन विद्वानों एवं विशेषज्ञों की समिति द्वारा किया जाता है। इसमें शब्द समाज और प्रचलन के आधार पर स्वतः विकसित होते हैं।
    7. इसका प्रयोग क्षेत्र सरकारी कार्यालयों तक सीमित होता है। इसका प्रयोग क्षेत्र व्यापक होता है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी होता है।
    8. राजभाषा के रूप में हिंदी का विकास धीरे-धीरे अंग्रेजी के विकल्प में हो रहा है। राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का प्रयोग देश-विदेश में सर्वत्र हो रहा है।

    जहाँ राजभाषा किसी देश की प्रशासनिक व्यवस्था का आधार होती है, वहीं राष्ट्रभाषा उस राष्ट्र की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक होती है। राजभाषा नियमों से चलती है, जबकि राष्ट्रभाषा जनभावनाओं से जुड़ी होती है। हिंदी वर्तमान में इन दोनों भूमिकाओं को सफलतापूर्वक निभाते हुए निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

    राजभाषा के विकास से सम्बन्धित संस्थाएँ

    क्रमांक संस्था का नाम स्थापना वर्ष
    1 प्रकाशन विभाग (सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1944 ई.
    2 फिल्म प्रभाग (सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1948 ई.
    3 साहित्य अकादमी, नई दिल्ली 1954 ई.
    4 पत्र सूचना कार्यालय (सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1956 ई.
    5 आकाशवाणी (सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1957 ई.
    6 नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली 1957 ई.
    7 केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, दिल्ली 1960 ई.
    8 वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली 1961 ई.
    9 राजभाषा विधायी आयोग (गृह मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1965-75 ई.
    10 केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो (गृह मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1971 ई.
    11 राजभाषा विभाग (गृह मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1975 ई.
    12 राजभाषा विधायी आयोग (कानून मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1975 ई.
    13 दूरदर्शन (सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय के अधीन), नई दिल्ली 1976 ई.

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    प्रश्न 1: राजभाषा का क्या अर्थ है? 

    उत्तर: राजभाषा का शाब्दिक अर्थ है—'राज-काज की भाषा'। वह भाषा जिसका प्रयोग किसी देश या राज्य के सरकारी कार्यालयों, शासन-प्रशासन और न्यायपालिका के कार्यों के लिए किया जाता है, उसे राजभाषा कहा जाता है।


    प्रश्न 2: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है? 

    उत्तर: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार, संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है।


    प्रश्न 3: राजभाषा और राष्ट्रभाषा में क्या मुख्य अंतर है? 

    उत्तर: राजभाषा सरकारी कामकाज और प्रशासन की भाषा होती है जो नियमों और संविधान द्वारा निर्धारित होती है। इसके विपरीत, राष्ट्रभाषा वह भाषा है जो पूरे राष्ट्र के लोगों की सांस्कृतिक पहचान होती है और जनमानस द्वारा स्वाभाविक रूप से बोली जाती है।


    प्रश्न 4: भारत की वर्तमान में कुल कितनी राजभाषाएं हैं? 

    उत्तर: केंद्र स्तर पर हिंदी संघ की राजभाषा है और अंग्रेजी सहायक राजभाषा (Co-official language) के रूप में प्रयुक्त होती है। इसके अलावा, संविधान की 8वीं अनुसूची में वर्तमान में 22 प्रादेशिक भाषाओं को शामिल किया गया है।


    प्रश्न 5: भारत में 'राजभाषा दिवस' (हिंदी दिवस) कब मनाया जाता है? 

    उत्तर: भारत में हर वर्ष 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।


    प्रश्न 6: राजभाषा आयोग का गठन कब और किसकी अध्यक्षता में हुआ था? 

    उत्तर: प्रथम राजभाषा आयोग का गठन 7 जून 1955 को हुआ था और इसके प्रथम अध्यक्ष बाल गंगाधर खरे (बी.जी. खरे) थे।


    निष्कर्ष

    राजभाषा और राष्ट्रभाषा दोनों ही किसी भी देश के भाषाई ढांचे के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। जहाँ राजभाषा प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए संवैधानिक नियमों से बंधी होती है, वहीं राष्ट्रभाषा जनता की भावनाओं और सांस्कृतिक एकता का प्रतिनिधित्व करती है। हिंदी आज इन दोनों ही रूपों में अपनी पहचान सशक्त कर रही है। एक विद्यार्थी और सजग नागरिक के तौर पर, राजभाषा के इन पहलुओं को समझना न केवल परीक्षाओं के लिए, बल्कि अपनी भाषाई विरासत के सम्मान के लिए भी अनिवार्य है।

    आशा है कि यह लेख राजभाषा को समझने में आपके लिए सहायक सिद्ध हुआ होगा। अपने विचार कमेंट में ज़रूर साझा करें।

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