यह मन्दिर का दीप इसे नीरव जलने दो – सारांश, व्याख्या और रहस्यवाद | महादेवी वर्मा
जन-मीडिया एवं समाज : अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, कार्य-क्षेत्र और सोशल मीडिया का प्रभाव
 'फिर विकल हैं प्राण मेरे' कविता की व्‍याख्‍या | महादेवी वर्मा
सम्मेलन (Conference): परिभाषा, प्रकार, प्रक्रिया, लाभ और उद्देश्य | सम्पूर्ण विवरण
कामायनी – जयशंकर प्रसाद का अमर महाकाव्य | प्रतीकात्मकता, विषयवस्तु और सारांश
संप्रेषण (Communication): अर्थ, परिभाषाएँ, प्रकार, प्रक्रिया, मॉडल एवं महत्व
 'मैं नीरभरी दुःख की बदली' कविता की व्‍याख्‍या | महादेवी वर्मा