इस लेख में गौतम बुद्ध का जीवन परिचय (Biography), बौद्ध धर्म के सिद्धांत, अष्टांग मार्ग, प्रमुख बौद्ध संगीतियाँ और भगवान बुद्ध के अनमोल विचारों को विस्तार से बताया गया है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण बौद्ध धर्म MCQ भी शामिल हैं।"
गौतम बुद्ध एवं बौद्ध धर्म के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस लेख को पढ़े।
गौतम बुद्ध एवं बौद्ध धर्म (Buddhism in Hindi) का परिचय
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संस्थापक | महात्मा बुद्ध (गौतम बुद्ध) |
| उपाधि | एशिया का ज्योतिपुंज (Light of Asia) |
| जन्म | 563 ईसा पूर्व, कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान पर (नेपाल) |
| पिता | शुद्धोधन |
| माता | महामाया (माया देवी) - मृत्यु जन्म के सातवें दिन |
| लालन-पालन | सौतेली माँ प्रजापति गौतमी |
| बचपन का नाम | सिद्धार्थ |
| विवाह | 16 वर्ष की अवस्था में यशोधरा के साथ |
| पुत्र | राहुल |
| गृह त्याग | 29 वर्ष की आयु में (महाभिनिष्क्रमण) |
| भ्रमण के दौरान देखी गई चार अवस्थाएं | 1. बूढ़ा व्यक्ति, 2. बीमार व्यक्ति, 3. शव, 4. संन्यासी |
| प्रथम गुरु | अलार कलाम (सांख्य दर्शन की शिक्षा ली) |
| ज्ञान प्राप्ति | 35 वर्ष की आयु में, वैशाख पूर्णिमा की रात, निरंजना नदी (फल्गु नदी) के किनारे, पीपल वृक्ष के नीचे (बोधगया) |
| प्रथम उपदेश | सारनाथ (धर्मचक्रप्रवर्तन) |
| उपदेश की भाषा | पाली |
| सर्वाधिक उपदेश | श्रावस्ती |
| चार सत्य कथन | 1. संसार दुखों से भरा है, 2. हर दुख का कारण है, 3. सबसे बड़ा कारण इच्छा है, 4. इच्छाओं पर नियंत्रण संभव है |
| बौद्ध धर्म के त्रिरत्न | बुद्ध, धम्म, संघ |
| अनुयायी के प्रकार | भिक्षुक (संन्यासी) और उपासक (गृहस्थ) |
| संघ में सम्मिलित होने की न्यूनतम आयु | 15 वर्ष |
| प्रतीक (जन्म) | कमल एवं सांड |
| प्रतीक (गृह त्याग) | घोड़ा |
| प्रतीक (ज्ञान) | पीपल (बोधि वृक्ष) |
| प्रतीक (निर्वाण) | पदचिह्न |
| प्रतीक (मृत्यु) | स्तूप |
| महापरिनिर्वाण (मृत्यु) | 80 वर्ष की अवस्था में, 483 ईसा पूर्व, कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) |
गौतम बुद्ध का प्रारंभिक जीवन (Gautam Buddha Early Life)
गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी के समकालीन थे। उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था। उनके पिता शुद्धोधन शाक्यवंश के राजा थे। कपिलवस्तु इनकी राजधानी थी। सिद्धार्थ का जन्म 563 ई.पू. कपिलवस्तु के निकट लुम्बिनी नामक स्थान में हुआ था। उनके जन्म के कुछ दिन बाद ही उनकी माता का देहान्त हो गया।
जब सिद्धार्थ पैदा हुए उस समय ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो बहुत बड़ा सम्राट बनेगा या संसार छोड़कर संन्यासी हो जायेगा। बचपन में सिद्धार्थ की खेलकूद में अधिक रुचि न थी। वे सोच विचार में लगे रहते थे। सिद्धार्थ का विवाह, यशोधरा नाम की सुन्दर स्त्री से हुआ जिससे उन्हें राहुल नाम का एक पुत्र भी उत्पन्न हुआ।
बुद्ध के चार दृश्य और उनका प्रभाव
सिद्धार्थ ने चार दृश्य देखे जिनसे उनका हृदय परिवर्तन हो गया। एक दिन उन्होंने बूढ़े आदमी, दूसरे दिन एक रोगी, तीसरे दिन एक मरे हुए व्यक्ति और चौथे दिन एक संन्यासी को देखा। उनके मन पर इन दृश्यों का इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि वे एक रात सब कुछ छोड़कर घर से निकल गये। इसके बाद पूरे छः वर्षों तक गौतम सांसारिक दुःख़ों एवं कष्टों का समाधान खोजने में लीन रहे। इस अवधि में उन्होंने समकालीन धार्मिक विचारधाराओं का अध्ययन, अनुशीलन और विश्लेषण किया।
ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण
अन्ततः 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल उन्हें बिहार के बोधगया नामक स्थान पर संबोधि (आत्म-ज्ञान) की प्राप्ति हुई। बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला धर्मोपदेश उन पाँच भिक्षुओं को दिया जो तपश्चर्या के दौरान उनके साथ रह चुके थे। तदुपरान्त पैंतालीस वर्षों तक भगवान बुद्ध ने दुःखी मानवता के कल्याण के लिए आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करते हुए उत्तर भारत के विभिन्न भागों में परिभ्रमण किया। 80 वर्ष की आयु में 483 ई.पू. में कुशीनगर में उनका देहान्त या महापरिनिर्वाण हुआ।
गौतम बुद्ध के उपदेश हिंदी में
गौतम बुद्ध (Gautam Buddha) ने अपने सम्पूर्ण संन्यासी जीवन में महत्वपूर्ण नैतिक उपदेश दिए जो व्यक्ति और समाज का नैतिक पथ पर मार्गदर्शन करते हैं। संक्षेप में गौतम बुद्ध के उपदेश इस प्रकार हैं-
1. वैदिक धर्म का विरोध -
महावीर स्वामी की भाँति बुद्ध ने भी यह नहीं माना कि वेद ईश्वर के रचे हुए हैं। उन्होंने वैदिक यज्ञों का खण्डन किया। यज्ञों के लिए पशु-वध किया जाता था, वह उन्हें बहुत बुरा लगता था।
2. क्षणिकवाद -
बुद्ध का कहना था कि संसार में जो कुछ भी है, बहुत थोड़े समय के लिए रहता है। कोई चीज स्थायी अर्थात् सदैव रहने वाली नहीं है। चीजें सदैव बदलती रहती हैं। इसे क्षणिकवाद का सिद्धांत कहते हैं।
3. दुःखवाद -
बुद्ध का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धान्त यह था कि "संसार दुःखों से भरा हुआ है। सब कुछ दुःखमय है। सुख क्षण भर के लिए रहता है। हर चीज में दुःख छिपा हुआ है।"
4. जीवन का उद्देश्य निर्वाण -
जीवन का उद्देश्य सब प्रकार के दुःखा स छुटकारा पाना है, इसी को निर्वाण कहते हैं। निर्वाण का अर्थ है बुझ जाना, जैसे- दीपक का बुझना। निर्वाण का अर्थ हुआ वह स्थिति जिसमें सुख-दुःख कुछ शेष नहीं रह जाता।
6. अहिंसा -
महावीर की भाँति बुद्ध ने भी अहिंसा पर अधिक बल दिया। उन्होंने यह भी सिखाया कि मनुष्य को किसी से बैर और घृणा नहीं करनी चाहिए। उनका कहना था कि बैर को बैर से, घृणा को घृणा से नहीं जीता जा सकता। बैर को प्रेम और बुराई को भलाई से जीतने का प्रयत्न करना चाहिए।
7. वर्ण-व्यवस्था का विरोध -
बुद्ध ने आर्यों की वर्ण-व्यवस्था का विरोध किया। वर्ण-व्यवस्था में ऊँच-नीच का भेद था। प्रायः शूद्रों को लोग नीच समझते थे और उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। बुद्ध का कहना था कि कोई जन्म से ब्राह्मण या शूद्र नहीं होता। आदमी कर्म से ब्राह्मण या शूद्र होता है।
8. स्वावलम्बन पर जोर -
बुद्ध के उपदेशों की एक बहुत बड़ी विशेषता यह थी कि, उन्होंने सिखाया कि निर्वाण प्राप्त करने के लिए हर आदमी को प्रयत्न करना चाहिए। इसमें कोई उसकी सहायता नहीं कर सकता। उसे स्वयं अपने अच्छे कर्मों से ही आगे बढ़ना है। बुद्ध यह भी मानते थे कि किसी देवी-देवता की प्रार्थना करने से आदमी का कल्याण नहीं हो सकता है। स्वावलम्बन बुद्ध के उपदेशों का सार था।
बुद्ध के पंचशील सिद्धांत
बुद्ध के नैतिक उपदेशों में शील पर बहुत जोर दिया गया है। नैतिक आचरण के लिए निम्नलिखित दस शीलों का पालन करना आवश्यक बताया गया है-
- दूसरों की सम्पत्ति की चाह न करना।
- हिंसा न करना।
- झूठ न बोलना।
- मादक द्रव्यों का सेवन न करना।
- व्यभिचार न करना।
- गाने-बजाने में भाग न लेना।
- सुगन्धित पदार्थों, फूलों का प्रयोग न करना।
- कुसमय भोजन न करना।
- आराम देने वाली चारपाई पर न सोना।
- रुपया-पैसा न ग्रहण करना और न रखना।
गौतम बुद्ध का अष्टांग मार्ग क्या है
बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त करने का जो मार्ग बताया वह आष्टांगिक मार्ग कहलाता है। उसमें आठ नियम हैं, इसलिए वह आष्टांगिक (आठ नियमों वाला) कहलाता है।
बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग या नियम इस प्रकार हैं-
- सम्यक दृष्टि - अन्धविश्वासों तथा भ्रान्तियों से मुक्त सही दृष्टि।
- सम्यक् संकल्प - सही विचार, उच्च प्रबुद्ध उत्साही व्यक्ति।
- सम्यक् वाक - सम्यक वाणी, जो उदार, मुक्त एवं सत्यपूर्ण हो।
- सम्यक कर्मान्त - सम्यक कार्य, जो शान्तिपूर्ण, सुन्दर और शुद्ध हों।
- सम्यक आजीव - उपयुक्त जीविका, जो किसी भी प्राणी को क्षति या कष्ट पहुँचाए बिना अर्जित की जाए।
- सम्यक व्यायाम - आत्म प्रशिक्षण और आत्म नियंत्रण की दिशा में सम्यक प्रयास।
- सम्यक स्मृति - सही सचेतनता, सक्रिय एवं सतर्क मन।
- सम्यक समाधि - सही एकाग्रता एवं जीवन के गहन रहस्यों पर गंभीर चिन्तन। यदि आदमी इस मार्ग पर चलकरं शुद्ध जीवन बिताए तो वह दुःखों से बच सकता है।
बुद्ध के चार आर्य सत्य क्या हैं
दुःख से मुक्ति पाने तथा निर्वाण प्राप्त करने के लिए बुद्ध ने चार आर्य सत्य बताये हैं। वास्तव में आर्य सत्य ही बुद्ध की शिक्षाओं का सार है।
गौतम बुद्ध के चार आर्य सत्य इस प्रकार हैं-
- दुःख
- समुदय (कारण)
- निरोध
- मार्ग।
पहला सत्य दुःख है, दूसरा सत्य है दुःख का समुदय (कारण), तीसरा सत्य है दुःख से छुटकारा तथा इसे प्राप्त करने का उपाय (मार्ग) भी बुद्ध ने बताया।
बौद्ध धर्म की भारत को देन
गौतम बुद्ध द्वारा भारतीय समाज को प्रदान की गई नैतिक और आध्यात्मिक देन को हम निम्न बिन्दुओं में देख सकते हैं-
1. करुणा तथा अहिंसा -
हमारे देश में अहिंसा की भावना हजारों वर्षों से बड़ी प्रबल रही है। यह बौद्ध धर्म की प्रमुख देन है। भारत ही ऐसा देश है, जहाँ पशु-पक्षियों और कीड़े-मकोड़ों तक को मारना पाप माना जाता है। जीव मात्र के लिए इतनी करुणा बौद्ध धर्म की मुख्य देन है।
2. सहिष्णुता -
सहिष्णुता का अर्थ है दूसरों की भावनाओं और विचारों का आदर करना, दूसरों पर अपने विचारों और विश्वास को बलपूर्वक न थोपना। धार्मिक सहिष्णुता इस देश की संस्कृति की विशेष देन रही है। बौद्ध धर्म ने इस भावना को दृढ़ करने में बड़ा योग दिया है।
3. सामाजिक समानता -
बौद्ध धर्म ने वर्ण-व्यवस्था का खण्डन किया। बौद्ध संघ में हर वर्ण के लोग सम्मिलित हो सकते थे। यद्यपि वर्ण-व्यवस्था हमारे देश में अब तक समाप्त नहीं हुई है, फिर भी बौद्ध धर्म ने उसके विरुद्ध वातावरण बनाया।
4. विश्व बंधुत्व का आदर्श -
हमारे देश में अत्यन्त प्राचीनकाल से यह भावना चली आयी है कि संसार के सभी देशों के लोग परस्पर भाई-भाई है। बौद्ध धर्म ने इस भावना को दृढ़ किया है। बौद्ध धर्म से प्रभावित हो कर ही अशोक ने युद्ध की नीति सदैव के लिए त्याग दी थी।
5. सदाचार पर जोर -
बौद्ध धर्म की मुख्य देन यह है कि उसने पूजा-पाठ के बजाय अच्छे कर्मों पर अधिक जोर दिया। उसने सिखाया कि पूजा-पाठ और प्रार्थना से मोक्ष नहीं मिल सकता, बल्कि आदमी को अच्छे कर्म करने चाहिए।
जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म: समानता और असमानता
जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म दोनों का उदय ब्राह्मण धर्म की बुराइयों की प्रतिक्रिया स्वरूप हुआ था। दोनों ही धर्मों का उद्देश्य ब्राह्मण धर्म की बुराइयों को दूर करके सरल, पवित्र तथा व्यावहारिक धर्म का प्रचार करना था। जैन तथा बौद्ध धर्म में समानताएँ तथा विषमताएँ दोनों ही विद्यमान हैं।
जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म की समानताएँ
1. सुधारवादी सम्प्रदाय - जैन और बौद्ध दोनों ही धर्म सुधारवादी थे। जैसे आचार-तत्व, सत्य, क्षमा, अहिंसा, सत्कर्म, वासनाओं का दमन और नैतिक आचरण के व्यावहारिक पक्ष पर अधिक बल दोनों ही धर्मों की विशेषता है।
2. मूल सिद्धान्त और लक्ष्य में समानता - दोनों धर्मों का मूल सिद्धांत है, सांसारिक कष्टों और जन्म-मरण के चक्कर से छुटकारा पाना तथा निर्वाण प्राप्त करना।
3. कर्मकाण्ड का विरोध - दोनों धर्मों ने ब्राह्मण धर्म की धार्मिक क्रिया-विधियों, कर्मकाण्ड, यज्ञ अनुष्ठान और पशुबलि आदि का विरोध किया।
4. बहुदेववाद का विरोध - दोनों ही धर्मों ने ब्राह्मण धर्म के बहुदेववाद का विरोध किया। निर्वाण प्राप्ति के लिए इन देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ आदि अनुष्ठानों को व्यर्थ बताया। उनका विचार था कि सत्कर्म और शुद्ध आचरण से ही निर्वाण प्राप्त हो सकता है।
5. जातिवाद का विरोध और सामाजिक समानता पर बल - जैन तथा बौद्ध दोनों ही धर्मों ने जाति प्रथा, ऊँच-नीच तथा छूआछूत का विरोध किया और सामाजिक समानता पर बल दिया। उन्होंने सभी वर्ग, स्त्री-पुरुष को समान समझा और सभी के लिए अपने धर्म के दरवाजे खोल दिये।
6. मानववादी, बुद्धिवादी और जनवादी धर्म - दोनों ही धर्म मानववादी थे। दोनों ही धर्मों ने सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए अपने सिद्धान्तों का प्रचार किया। दोनों ही धर्मों ने तर्क, विवेक और बुद्धि के आधार पर सत्य और ज्ञान के सिद्धान्तों का प्रचार किया।
जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म की असमानताएँ
1. अहिंसा की अवधारणा में अन्तर - जैन तथा बौद्ध धर्म में अहिंसा पर बल दिया गया है। लेकिन जहाँ जैन धर्म पेड़-पौधों, वनस्पति, छोटे-बड़े सभी जीवों में प्राण मानता है और उनको आघात पहुँचाना पाप समझता है, वहीं दूसरी ओर बौद्ध धर्म में विशेष परिस्थितियों में जीव-हत्या, तथा मांस का उपयोग उचित माना गया है।
2. निर्वाण की धारणा में मतभेद - दोनों धर्मों के निर्वाण के सिद्धान्त में अन्तर है। जैन धर्म के अनुसार निर्वाण का अर्थ मानव शरीर से मुक्ति पाना और सांसारिक कष्टों से मुक्ति है, जबकि बौद्ध धर्म में निर्वाण का अर्थ अस्तित्व में मुक्ति, व्यक्तित्व का पूर्णरूप से नाश है।
3. निर्वाण प्राप्ति के साधनों में अन्तर - जैन धर्म में कठिन तपस्या, व्रत, उपवास, काया-क्लेश, आदि को निर्वाण प्राप्ति के लिए आवश्यक माना गया है जबकि बौद्ध धर्म में शारीरिक यातनाओं और कठोर तपस्या का विरोध किया गया है।
बुद्ध धर्म के प्रमुख स्थान
1. लुम्बिनी (नेपाल) - जन्म स्थान
यह वह स्थान है जहाँ राजकुमार सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) का जन्म हुआ था। यह वर्तमान नेपाल में स्थित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह पर माया देवी मंदिर और सम्राट अशोक द्वारा स्थापित अशोक स्तंभ प्रमुख आकर्षण है।
2. बोधगया (बिहार) - ज्ञान प्राप्ति
यह बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। यहीं पर एक पीपल के पेड़ (बोधि वृक्ष) के नीचे कठिन तपस्या के बाद बुद्ध को 'निर्वाण' या ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह पर प्रमुख आकर्षण महाबोधि मंदिर और बोधि वृक्ष है।
3. सारनाथ (उत्तर प्रदेश) - प्रथम उपदेश
ज्ञान प्राप्ति के बाद, बुद्ध ने अपना सबसे पहला उपदेश वाराणसी के पास सारनाथ में दिया था। इसे 'धर्मचक्रप्रवर्तन' कहा जाता है। यहां धमेख स्तूप और चौखंडी स्तूप है तथा यहाँ भारत का राष्ट्रीय चिह्न 'अशोक की लाट' भी स्थित है।
4. कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) - महापरिनिर्वाण
यहीं पर भगवान बुद्ध ने 80 वर्ष की आयु में अपने शरीर का त्याग किया था, जिसे बौद्ध परंपरा में 'महापरिनिर्वाण' कहा जाता है। प्रमुख आकर्षण महापरिनिर्वाण मंदिर और रामभर स्तूप (जहाँ बुद्ध का अंतिम संस्कार हुआ था)।
अन्य महत्वपूर्ण स्थान -
- श्रावस्ती: यहाँ बुद्ध ने अपने जीवन के सबसे अधिक 'वर्षावास' (Monsoon retreats) बिताए और कई चमत्कार दिखाए।
- राजगीर: यहाँ बुद्ध अक्सर ध्यान लगाया करते थे और यहीं प्रथम बौद्ध संगीति (First Buddhist Council) हुई थी।
- सांची (मध्य प्रदेश): यहाँ के स्तूप अपनी वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, जिन्हें सम्राट अशोक ने बनवाया था।
- नालंदा: प्राचीन काल में यह बौद्ध शिक्षा और दर्शन का सबसे बड़ा केंद्र था।
प्रमुख बौद्ध संगीतियाँ
बौद्ध संगीति (बौद्ध परिषदें) महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके उपदेशों को संकलित करने और विवादों को सुलझाने के लिए आयोजित चार प्रमुख सभाएं थीं। जो इस प्रकार है -
| बौद्ध संगीति | समय | स्थान | अध्यक्ष/पुरोहित | शासनकाल (राजा) |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम बौद्ध संगीति | 483 ई.पू. | राजगीर | महाकश्यप | अजातशत्रु |
| द्वितीय बौद्ध संगीति | 383 ई.पू. | वैशाली | सभाकामी | कालाशोक |
| तृतीय बौद्ध संगीति | 255 ई.पू. | पाटलिपुत्र | मोगलिपुत्त तिस्स | अशोक |
| चतुर्थ बौद्ध संगीति | प्रथम ईस्वी | कुंडलवन | वसुमित्र (अध्यक्ष), अश्वघोष (उपाध्यक्ष) |
कनिष्क |
बौद्ध साहित्य
1. त्रिपिटक: यह बौद्ध धर्म से संबंधित है। यह मूल रूप से पाली भाषा में रचे गए हैं। इनकी संख्या 3 है:
- विनय पिटक: इसमें भिक्षु एवं भिक्षुणियों के आचरण संबंधी नियम हैं।
- सुत्त पिटक: इसमें बौद्ध धर्म के उपदेशों को संकलित किया गया है।
- अभिधम्म पिटक: इसमें बौद्ध धर्म की दार्शनिक व्याख्याएं की गई हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण भाग 'कथावस्तु' है।
2. जातक कथाएं: यह मूल रूप से पाली भाषा में रची गई हैं। इनकी संख्या 549 है। इसमें बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाएं हैं।
3. बुद्धचरित: इसकी रचना संस्कृत भाषा में हुई है। अश्वघोष द्वारा रचित यह एक महाकाव्य है। इसे 'बौद्धों का रामायण' कहा जाता है।
4. धम्मपद: इसे 'बौद्धों की गीता' कहा जाता है।
गौतम बुद्ध के अनमोल विचार (Gautam Buddha Quotes in Hindi)
गौतम बुद्ध के प्रेरणादायक सुविचार (Quotes) का हम जानते है, जिन्होंने लोगों के जीवन में परिर्वतन कर, नये जीवन का बीज बोने का काम किया है -
🙏 जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से अच्छा है कि तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो। फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, इसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता। - गौतम बुद्ध (Gautam Buddha)
📖 भविष्य के सपनों में मत खोओ और भूतकाल में मत उलझो सिर्फ वर्तमान पर ध्यान दो। जीवन में खुश रहने का यही एक सही रास्ता है। - महात्मा बुद्ध (Mahatma Buddha)
💡किसी भी हालात में तीन चीजें कभी भी छुपी नहीं रह सकती, वो है- सूर्य, चन्द्रमा और सत्य। - गौतम बुद्ध (Gautam Buddha)
✨जीवन में किसी उद्देश्य या लक्ष्य तक पहुंचने से ज्यादा महत्वपूर्ण उस यात्रा को अच्छे से संपन्न करना होता है। - महात्मा बुद्ध (Mahatma Buddha)
💡बुराई से बुराई कभी खत्म नहीं होती। घृणा को तो केवल प्रेम द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है, यह एक अटूट सत्य है। - महात्मा बुद्ध (Mahatma Buddha)
✊सत्य के मार्ग पर चलते हुए व्यक्ति केवल दो ही गलतियां कर सकता है, पहली या तो पूरा रास्ता न तय करना, दूसरी या फिर शुरुआत ही न करना। - महात्मा बुद्ध (Mahatma Buddha)
🙏जिस तरह एक जलते हुए दीये से हजारों दीपक रोशन किए जा सकते है, फिर भी उस दीये की रोशनी कम नहीं होती, उसी तरह खुशियां बांटने से हमेशा बढ़ती है, कभी कम नहीं होती। - भगवान बुद्ध (Lord Buddha)
✨जीवन में आप चाहें जितनी अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ लो, कितने भी अच्छे शब्द सुनो, लेकिन जब तक आप उनको अपने जीवन में नहीं अपनाते तब तक उसका कोई फायदा नहीं होगा। - भगवान बुद्ध (Lord Buddha)
📖हमेशा क्रोधित रहना, जलते हुए कोयले को किसी दूसरे व्यक्ति पर फेंकने की इच्छा से पकड़ रखने के समान है। यह क्रोध सबसे पहले आपको ही जलाता है। -भगवान बुद्ध (Lord Buddha)
✊क्रोध में हजारों शब्दों को गलत बोलने से अच्छा, मौन वह एक शब्द है जो जीवन में शांति लाता है।- भगवान बुद्ध (Lord Buddha)
बौद्ध धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (GAUTAM BUDH MCQ)
बौद्ध धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर दिये गये है-
1. सांची का स्तूप का निर्माण किसने करवाया था?
2. अजंता और एलोरा की गुफाएं भारत के किस राज्य में स्थित हैं?
3. 'एशिया का प्रकाश' (Light of Asia) कहा जाता है?
4. गौतम बुद्ध ने महापरिनिर्वाण कहाँ पर लिया था?
5. सारनाथ स्तंभ का चक्र निम्न में से किसे इंगित करता है?
6. कौन सा स्थान गौतम बुद्ध से संबंधित नहीं है?
7. भगवान बुद्ध ने अपना पहला धर्मोपदेश कहाँ पर दिया था?
8. विख्यात 'बोरोबुदुर' बुद्ध मंदिर कहाँ पर स्थित है?
9. बुद्ध का जन्म ______ में हुआ था?
10. गौतम बुद्ध का वास्तविक नाम क्या था?
11. त्रिपिटक धर्म ग्रंथ का संबंध किस धर्म से है?
12. बौद्ध धर्म का संरक्षक कुषाण शासक कौन था?
13. बुद्ध की मृत्यु जहाँ हुई थी, वह स्थान अब कहाँ है?
14. 'धर्मचक्रप्रवर्तन' किया गया था?
15. बुद्ध की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?
16. बुद्ध, धम्म और संघ मिलकर क्या कहलाते हैं?





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