भारतीय नवजागरण और स्वाधीनता आन्दोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि | कारण, प्रभाव और प्रमुख सुधारक

भारतीय नवजागरण के कारण

भारतीय नवजागरण और स्वाधीनता आन्दोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि

  • नवजागरण से अर्थ एक नए विचार या नई चेतना से है जिसके कारण देश में आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक व सामाजिक बदलाव लाया जा सकता हो।
  • 10वीं शताब्दों को भारतीय नवजागरण का काल माना जाता है, जिसे 'रैनेसां', पुनरुत्थान, पुनर्जागरण, नवोत्थान, नजागरण आदि की संज्ञा दी गई है।
  • भारत में नवजागरण शब्द का पहला प्रयोग रामविलास शर्मा ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'महावीर प्रसाद द्विवेदी और नवजागरण' में किया।

प्रमुख सुधारवादी व प्रभावी नेता और उनके कार्य

  1. राजा राममोहन राय (भारतीय नवजागरण का अग्रदूत)
  2. दयानन्द सरस्वती (धार्मिक कर्मकांडों का विरोध)
  3. ईश्वर चन्द्र विद्यासागर (विधवा पनर्विवाह के लिए संघर्ष)
  4. ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले (जाति उत्पीड़न का विरोध) इत्यादि।

भारतीय नवजागरण का प्रभाव

  1. लोगों में अधिकारों के प्रति जागरूकता का उदय
  2. राजनीतिक चेतना का उदय कांग्रेस की स्थापना
  3. किसान अंग्रेजों की नीतियों से वाकिफ हुए
  4. आर्थिक शोषण के खिलाफ संघर्ष (दादा भाई नरौजी द्वारा)
  5. राष्ट्रीयता की भावना से स्वतंत्रता संग्राम का उदय व स्वदेशी की मांग

भारतीय नवजागरण की विशेषताएं

भारत में नवजागरण की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है-  
  1. स्वातंत्र्य-चेतना
  2. प्रदर्शन कलाओं का विकास
  3. समाज और धर्म में सुधार
  4. राष्ट्रप्रेम
  5. जनवादी विचारधारा
  6. अंग्रेज़ी साहित्य, विचारों, और दर्शन का अध्ययन
  7. भारतीय संस्कृति का गौरवगान

भारत में नवजागरण के कारण 

भारत में नवजागरण के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी थे – 

  1. हिन्दू धर्म व समाज के दोष
  2. राष्ट्रीयता की भावना का विकास 
  3. पाश्चात्य शिक्षा का प्रसार
  4. महान् सुधारकों का जन्म 
  5. प्रेस तथा साहित्य का योगदान
  6. यातायात तथा डाक-व्यवस्था का प्रभाव
  7.  विदेशी घटनाओं का प्रभाव
  8. ईसाई धर्म का प्रचार

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ