प्रभावी संप्रेषण की बाधाएँ (Barriers of Effective Communication) – प्रकार एवं विवरण

प्रभावी संप्रेषण की प्रमुख बाधाएँ जैसे भाषागत, भौतिक, मनोवैज्ञानिक, संगठनात्मक एवं व्यक्तिगत अवरोधों का संक्षिप्त एवं सरल विवरण। परीक्षा एवं शैक्षणिक उपयोग हेतु महत्वपूर्ण नोट्स।

    प्रभावी संप्रेषण की बाधाएँ

    प्रभावी संप्रेषण की बाधाएँ/अवरोध

    Barriers of Effectives Communication

    संप्रेषण का प्रमुख उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा समूह को संवाद का अर्थबोध कराना है, परन्तु कभी-कभी किसी कारणवश प्रेषक (Sender) द्वारा दिए गए संवाद को प्राप्तकर्ता (Receiver) अलग रूप में समझ लेता है, जिससे इच्छित उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होती। इन्हीं कारणों को अवरोध या बाधा कहा जाता है। इन बाधाओं को निम्न भागों में विभाजित किया गया है

    भाषागत अवरोध 

    Language Barriers

    भाषा हमारे विचारों को प्रकट करने का मुख्य साधन है, परन्तु भाषा की विभिन्नता प्रभाव संप्रेषण के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। भाषा अवरोध के अन्तर्गत अल्प भाषा ज्ञान, अर्थ की अस्पष्टता, उच्चारण दोष, तकनीकी भाषा ज्ञान का अभाव एवं सांस्कृतिक विभिन्नता आदि को शामिल किया जाता है, जिसका वर्णन निम्न प्रकार से है -

    1. अल्प भाषा ज्ञान (Insufficient Knowledge of a Language) आज का युग वैश्वीकरण का युग है, जिससे विभिन्न देशों में तकनीक, व्यापार, शिक्षा आदि के लिए वार्तालाप की आवश्यकता होती है, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि एक व्यक्ति को सभी भाषाओं का ज्ञान हो। इसी भाषायी ज्ञान के अभाव में संचार में बाधा उत्पन्न होती है।

    2. अर्थ की अस्पष्टता (Unclearity of Meaning) यदि संवाद के लिए उचित शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया हो तथा संवाद का अर्थ स्पष्ट न हो तो प्राप्तकर्ता (Receiver) द्वारा संवाद का गलत अर्थ निकालने की सम्भावना बढ़ जाती है, जिसके कारण संचार बाधित होता है।

    3. तकनीकी भाषा ज्ञान का अभाव (Lack of Technical Knowledge) विभिन्न व्यवसायों, संगठनों एवं विभागों आदि की अपनी विशेष तकनीकी भाषा होती है। इस भाषा से सभी लोग परिचित नहीं होते हैं। यदि तकनीकी भाषा में सन्देश अन्य लोगों के पास संप्रेषित होता है, तो वह इसे समझ नहीं पाते हैं जिस कारण संप्रेषण में अवरोध उत्पन्न होता है।

    4. सांस्कृतिक विभिन्नता (Cultural Differences) विभिन्न संस्कृतियों में संकेतों एवं शब्दों का अर्थ भिन्न-भिन्न होता है। अतः संचार तभी प्रभावी होगा जब सांस्कृतिक आदर्शों, अपेक्षाओं एवं मान्यताओं को समझा जा सके। समान संस्कृति में संचार सुविधाजनक होता है।

    भौतिक अवरोध 

    Physical Barriers

    भौतिक अवरोध दोषपूर्ण भौतिक अवस्थाओं के कारण उत्पन्न होते हैं। भौतिक अवरोध अनेक प्रकार के होते हैं; जैसे- पेन को डेस्क पर बार-बार बजाना, टाइपिंग मशीन से टाइपिंग की आवाज का आना, संप्रेषण प्रक्रिया के दौरान चाय या कॉफी का दिया जाना आदि।

    मनोवैज्ञानिक अवरोध 

    Psychological Barriers

    इसके अन्तर्गत अरुचि, पूर्वधारणाएँ, चिन्ता, अवधान का अभाव, मतभेद, विपरीत भावनाएँ, धारणाएँ एवं मानसिक भय आदि आते हैं। यह प्रभावी अवरोध है, क्योकि जब तक प्रेषक (Sender) एवं प्राप्तकर्ता (Receiver) मानसिक रूप से सचेत नहीं होंगे, तब तक संप्रेषण प्रक्रिया प्रभावी नहीं हो सकती है। इसके अन्तर्गत निम्न धारणाएँ आती हैं -

    1. अरुचि - प्रेषक एवं प्राप्तकर्ता संप्रेषण प्रक्रिया के मुख्य बिन्दु हैं। यदि किसी कारणवश दोनों में से किसी की रुचि संप्रेषण प्रक्रिया में नहीं है, तो संप्रेषण अप्रभावी होगा।

    2. पूर्वधारणा - पूर्वधारणाओं से प्रेरित होकर हम ऐसी सूचनाओं पर ध्यान नहीं देते जो हमारी मान्यताओं एवं आदर्शों के विरुद्ध हों, जिसके कारण संप्रेषण प्रक्रिया बाधित होती है।

    3. मानसिक भ्रम - भय से पीड़ित व्यक्ति किसी संप्रेषित सन्देश में शीघ्र ही रक्षात्मक युक्ति अपनाते हुए प्रतिक्रिया दे देता है जिसके कारण वह सन्देश का सही अर्थ नहीं समझ पाता।

    उदाहरणस्वरूप, एक भयभीत ईमानदार व्यक्ति भी यह पूछने पर कि चोरी किसने की है तुरन्त अपने बचाव में प्रतिक्रिया देकर शक के दायरे में आ जाता है, जिसके कारण संप्रेषण प्रक्रिया बाधित होती है।

    4. व्यक्तिगत मतभेद - यदि प्रेषक एवं प्राप्तकर्ता के मध्य व्यक्तिगत मतभेदः जैसे-विचारों को समर्थन न देना, विपरीत मनोभावनाएँ होना एवं एक-दूसरे को पसन्द न करना आदि हो, तो संवाद का उद्देश्य स्पष्ट नहीं होता है।

    संगठनात्मक अवरोध 

    Organisation Barriers

    संगठन में निर्धारित उ‌द्देश्यों की प्राप्ति के लिए एक संरचना तैयार की जाती है। इस संरचना के सफल संचालन के लिए नियम, आचार संहिता एवं सिद्धान्तों का निर्माण किया जाता है। संगठन के प्रत्येक स्तर को एक धागे में बाँधने के लिए संप्रेषण व्यवस्था अत्यन्त आवश्यक है। परन्तु कभी-कभी कुछ बाधाएँ संगठन की संप्रेषण व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, जिनका विवरण निम्न प्रकार से है -

    1. संगठनात्मक नियम एवं सिद्धान्त - नियम एवं सिद्धान्त संगठन के प्रत्येक स्तर पर संप्रेषण व्यवस्था में जाल का निर्माण करते हैं। नियमों के अत्यधिक जटिल होने के कारण संप्रेषण प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है। संप्रेषण का अभाव, संप्रेषण के कुछ अंश छूटने, अफवाह आदि से संप्रेषण में बहुत-सी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं।

    2. लक्ष्य सम्बन्धी विवाद - संगठन के प्रत्येक स्तर पर लक्ष्य निर्धारित होते हैं। इन लक्ष्यों के कारण विवाद उत्पन्न होते हैं। संप्रेषण विवादों को कम करने का प्रमुख साधन है, परन्तु विवाद होने पर संप्रेषण न्यूनतम हो जाता है जिसके कारण गलत सूचना, शिकायत, सन्देश संचारित होते हैं, जिससे अनेक बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।

    3. शोर - शोर मौखिक संप्रेषण में एक मुख्य बाधा है। कारखानों में मशीनों के शोर से मौखिक संप्रेषण बाधित होता है। इसी प्रकार तकनीकी खराबी के कारण टी.वी. प्रसारण एवं ध्वनि तरंगों में गड़बड़ी के कारण अन्य संप्रेषण; जैसे-रेडियो, मोबाइल आदि व्यवस्था प्रभावित होती है।

    4. समय एवं दूरी - प्रेषक एवं प्राप्तकर्ता के मध्य संप्रेषण के स्वाभाविक प्रवास में महत्त्वपूर्ण बाधा है। वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी के नवीन यन्त्रों कम्प्यूटर, विडियो कॉन्फ्रेन्सिग, ई-मेल, टेलीग्राम, इण्टरनेट एवं स्पीड पोस्ट आदि ने समय व दूरी को कम कर दिया है, परन्तु कभी-कभी यान्त्रिक गड़बड़ी के कारण यह सेवाएँ भी प्रभावी नहीं रहती, जिससे प्रेषक (Sender) एवं प्राप्तकर्ता (Receiver) के मध्य संप्रेषण में बाधा उत्पन्न होती है।

    व्यक्तिगत अवरोध 

    Personal Barriers

    संप्रेषण अन्ततः व्यक्तिगत सम्बन्धों की प्रक्रिया है, कुछ विपरीत परिस्थितियाँ; जैसे- व्यक्तिगत विभेद, व्यक्तिगत मूल्यों की विभिन्नता एवं अधिकार क्षेत्र आदि संप्रेषण में अवरोध उत्पन्न करते हैं। व्यक्तिगत अवरोधों को मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया गया है

    1. उच्च अधिकारियों की बाधाएँ (Barriers of Superiors) - प्रत्येक संगठन में शीर्ष पर उच्च अधिकारी होते हैं, जिन्हें महत्त्वपूर्ण लक्ष्य एवं कार्यों को सम्पन्न कराने के लिए अपने अधीनस्थों से संप्रेषण स्थापित करना पड़ता है, परन्तु कभी-कभी कुछ विपरीत परिस्थितियों के कारण संप्रेषण प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।

    2. अधीनस्थों की बाधाएँ (Difficulties of Subordinate) - संगठन की संप्रेषण प्रक्रिया में उच्च अधिकारियों के साथ-साथ अधीनस्थ कर्मचारियों की भी महत्त्वपूर्ण स्थिति होती है, परन्तु अधीनस्थों को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जो निम्न हैं

    • प्रेरणा का अभाव अधीनस्थों को संप्रेषण के प्रति उदासीन बनाता है। संस्था की निन्दा एवं प्रशंसा, पुरस्कार एवं दण्ड की नीति भी कुछ सीमा तक इसके लिए उत्तरदायी है। उचित प्रेरणा का अभाव होने के कारण वे अपने विचार प्रस्तुत ही नहीं कर पाते हैं, क्योंकि उन्हें यह शंका बनी रहती है कि उनके विचारों को मान्यता नहीं मिलेगी।
    • अधीनस्थ सदैव संप्रेषण करने के लिए सुरक्षात्मक संवाद शैली का प्रयोग करते हैं, जिससे कभी-कभी मूल संवाद का अर्थ बदल जाता है।
    • अधीनस्थों में संप्रेषण के प्रति अपने अधिकारों से सम्बंन्धित जागरूकता का अभाव होता है, जिससे वे उच्च अधिकारियों के भय के कारण अपने विचारों को खुलकर उनके सम्मुख प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं।

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