ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है। इस लेख में ज्ञानपीठ पुरस्कार का इतिहास, स्थापना, उद्देश्य, पात्रता और प्रमुख विजेताओं की सूची के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार क्या है?
ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च और सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार उन साहित्यकारों को दिया जाता है जिन्होंने भारतीय भाषाओं के साहित्य को समृद्ध बनाने में असाधारण योगदान दिया हो। देश के अनेक महान कवि, उपन्यासकार और साहित्यकार इस सम्मान से अलंकृत हो चुके हैं।
यह सम्मान भारतीय ज्ञानपीठ संस्था द्वारा प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1961 में हुई थी और इसे पहली बार 1965 में प्रदान किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं के उत्कृष्ट साहित्य को प्रोत्साहित करना और महान साहित्यकारों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार का उद्देश्य
ज्ञानपीठ पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य भारत की विविध भाषाओं में रचित श्रेष्ठ साहित्य को सम्मान देना है। यह पुरस्कार किसी एक पुस्तक के लिए नहीं बल्कि लेखक के समग्र साहित्यिक योगदान के आधार पर दिया जाता है। इससे भारतीय साहित्य की परंपरा को मजबूत करने और नए रचनाकारों को प्रेरणा देने में सहायता मिलती है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए पात्रता
ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए वही साहित्यकार पात्र माने जाते हैं जो भारत की संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में साहित्य रचना करते हैं। चयन प्रक्रिया में लेखक की साहित्यिक गुणवत्ता, रचनात्मकता और साहित्य में दीर्घकालीन योगदान को प्रमुख आधार माना जाता है।
पुरस्कार में क्या-क्या दिया जाता है
ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाले साहित्यकार को सम्मान स्वरूप कई चीजें प्रदान की जाती हैं—
- वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा
- सम्मान पत्र
- लगभग 11 लाख रुपये की पुरस्कार राशि
पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार
ज्ञानपीठ पुरस्कार पहली बार मलयालम भाषा के प्रसिद्ध कवि जी. शंकर कुरुप को दिया गया था। उन्हें उनकी प्रसिद्ध काव्य कृति ओडक्कुझल के लिए यह सम्मान प्राप्त हुआ था।
हिंदी भाषा के प्रमुख ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता
हिंदी साहित्य के कई महान साहित्यकारों को भी यह सम्मान मिल चुका है। इनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—
- सुमित्रानंदन पंत
- रामधारी सिंह दिनकर
- महादेवी वर्मा
- नरेश मेहता
- कुँवर नारायण
- अमरकांत
- श्रीलाल शुक्ल
इन साहित्यकारों की रचनाओं ने हिंदी साहित्य को नई दिशा और समृद्धि प्रदान की है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार का महत्व
ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य जगत में अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है। यह केवल एक सम्मान नहीं बल्कि साहित्यकार के जीवन भर के योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति भी है। इस पुरस्कार के माध्यम से भारतीय भाषाओं के साहित्य को व्यापक पहचान मिलती है और नई पीढ़ी के लेखकों को भी उत्कृष्ट रचना के लिए प्रेरणा मिलती है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता
| क्रमांक | ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता | भाषा | वर्ष |
|---|---|---|---|
| 1 | जी. शंकर कुरुप | मलयालम | 1965 |
| 2 | ताराशंकर बंदोपाध्याय | बांग्ला | 1966 |
| 3 | उमा शंकर जोशी | गुजराती | 1967 |
| 3 | कुप्पाली वेंकटप्पागौड़ा पुट्टप्पा | कन्नड़ | 1967 |
| 4 | सुमित्रानंदन पंत | हिंदी | 1968 |
| 5 | फ़िराक़ गोरखपुरी | उर्दू | 1969 |
| 6 | विश्वनाथ सत्यनारायण | तेलुगू | 1970 |
| 7 | बिष्णु डे | बांग्ला | 1971 |
| 8 | रामधारी सिंह 'दिनकर' | हिंदी | 1972 |
| 9 | दत्तात्रेय रामचंद्र बेंद्रे | कन्नड़ | 1973 |
| 9 | गोपीनाथ मोहंती | ओड़िया | 1973 |
| 10 | विष्णु सखाराम खांडेकर | मराठी | 1974 |
| 11 | पी. वी. अकिलन | तमिल | 1975 |
| 12 | आशापूर्णा देवी | बांग्ला | 1976 |
| 13 | के. शिवराम कारंत | कन्नड़ | 1977 |
| 14 | सच्चिदानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' | हिंदी | 1978 |
| 15 | बीरेंद्र कुमार भट्टाचार्य | असमिया | 1979 |
| 16 | एस. के. पोट्टेक्कट | मलयालम | 1980 |
| 17 | अमृता प्रीतम | पंजाबी | 1981 |
| 18 | महादेवी वर्मा | हिंदी | 1982 |
| 19 | मस्ती वेंकटेश अयंगर | कन्नड़ | 1983 |
| 20 | थकाझी शिवशंकर पिल्लई | मलयालम | 1984 |
| 21 | पन्नालाल पटेल | गुजराती | 1985 |
| 22 | सचिदानंद राउत्रे | ओड़िया | 1986 |
| 23 | विष्णु वामन शिरवाडकर | मराठी | 1987 |
| 24 | सी. नारायण रेड्डी | तेलुगू | 1988 |
| 25 | कुर्रतुलऐन हैदर | उर्दू | 1989 |
| 26 | विनायक कृष्ण गोकक | कन्नड़ | 1990 |
| 27 | सुभाष मुखोपाध्याय | बांग्ला | 1991 |
| 28 | नरेश मेहता | हिंदी | 1992 |
| 29 | सीताकांत महापात्रा | ओड़िया | 1993 |
| 30 | यू. आर. अनंतमूर्ति | कन्नड़ | 1994 |
| 31 | एम. टी. वासुदेवन नायर | मलयालम | 1995 |
| 32 | महाश्वेता देवी | बांग्ला | 1996 |
| 33 | अली सरदार जाफ़री | उर्दू | 1997 |
| 34 | गिरीश कर्नाड | कन्नड़ | 1998 |
| 35 | निर्मल वर्मा | हिंदी | 1999 |
| 35 | गुरदयाल सिंह | पंजाबी | 1999 |
| 36 | इंदिरा गोस्वामी | असमिया | 2000 |
| 37 | राजेंद्र शाह | गुजराती | 2001 |
| 38 | डी. जयकांतन | तमिल | 2002 |
| 39 | विंदा करंदीकर | मराठी | 2003 |
| 40 | रहमान राही | कश्मीरी | 2004 |
| 41 | कुंवर नारायण | हिंदी | 2005 |
| 42 | रवींद्र केलेकर | कोंकणी | 2006 |
| 42 | सत्यव्रत शास्त्री | संस्कृत | 2006 |
| 43 | ओ. एन. वी. कुरुप | मलयालम | 2007 |
| 44 | अख़लाक मोहम्मद खान 'शहरयार' | उर्दू | 2008 |
| 45 | अमरकांत | हिंदी | 2009 |
| 45 | श्रीलाल शुक्ल | हिंदी | 2009 |
| 46 | चंद्रशेखर कंबारा | कन्नड़ | 2010 |
| 47 | प्रतिभा राय | ओड़िया | 2011 |
| 48 | रवुरी भारद्वाज | तेलुगू | 2012 |
| 49 | केदारनाथ सिंह | हिंदी | 2013 |
| 50 | बालचंद्र नेमाडे | मराठी | 2014 |
| 51 | रघुवीर चौधरी | गुजराती | 2015 |
| 52 | शंख घोष | बांग्ला | 2016 |
| 53 | कृष्णा सोबती | हिंदी | 2017 |
| 54 | अमिताव घोष | अंग्रेज़ी | 2018 |
| 55 | अक्कितम अच्युतन नम्बूथिरी | मलयालम | 2019 |
| 56 | नीलमणि फूकन | असमिया | 2021 |
| 57 | दामोदर मौज़ो | कोंकणी | 2022 |
| 58 | गुलजार | उर्दू | 2023 |
| 58 | जगद्गुरु रामभद्राचार्य | संस्कृत | 2023 |
| 59 | विनोद कुमार शुक्ल | हिंदी | 2024 |
निष्कर्ष
ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है। यह पुरस्कार उन साहित्यकारों को दिया जाता है जिन्होंने भारतीय भाषाओं के साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस सम्मान के माध्यम से भारतीय साहित्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।
FAQs
प्रश्न 1 – ज्ञानपीठ पुरस्कार क्या है?
उत्तर: ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जो भारतीय भाषाओं के उत्कृष्ट साहित्यकारों को दिया जाता है।
प्रश्न 2 – ज्ञानपीठ पुरस्कार की स्थापना कब हुई?
उत्तर: ज्ञानपीठ पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1961 में हुई थी।
प्रश्न 3 – पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार किसे मिला था?
उत्तर: पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1965 में जी. शंकर कुरुप को दिया गया था।
प्रश्न 4 – ज्ञानपीठ पुरस्कार में कितनी राशि दी जाती है?
उत्तर: ज्ञानपीठ पुरस्कार में लगभग 11 लाख रुपये, सम्मान पत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाती है।


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