शोध प्रबन्ध लेखन (Thesis Writing): प्रारूप, शैली, विषयवस्तु एवं विशेषताएँ

शोध प्रबन्ध लेखन (Thesis Writing) शोध के समस्त तथ्यों के संकलन, विश्लेषण और निष्कर्ष का सुव्यवस्थित प्रस्तुतीकरण है। इस लेख में शोध प्रबन्ध के तीनों भागों, लेखन प्रारूप, संदर्भ शैली, शोध अभिकल्प, शोध कार्यविधि, विषयवस्तु, आवश्यक बिंदु एवं विशेषताओं का विस्तृत विवेचन किया गया है। यह सामग्री M.A., M.Phil., Ph.D. तथा शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी और परीक्षा-उपयोगी मार्गदर्शिका है।

शोध प्रबन्ध लेखन

    शोध प्रबन्ध लेखन 

    Thesis Writing

    • शोध प्रबन्ध लेखन उस विधा को कहा जाता है, जो शोध के सम्पूर्ण तथ्यों को एकत्रित एवं संकलित करने के पश्चात् निष्कर्ष के रूप में सामने आता है। इस प्रबन्ध लेखन का मुख्य कार्य लेखन के किसी विशेष क्षेत्र में प्रचलित तथ्य, ज्ञान को किसी दूसरे शोधकर्ताओं के लिए सरल बनाकर प्रस्तुत करना है।
    • शोध प्रबन्ध लेखन अन्य शोधकर्ताओं को शोध हेतु विषयवस्तु, उपलब्ध कराकर शोधकर्ताओं का मूल्यवान समय बचाता है।
    • शोध प्रबन्ध लेखन को 'शोध निबन्ध' अथवा 'शोध लेख' या 'शोध विवरण' के नाम से भी जाना जाता है। भारत एवं यूरोप में शोध निबन्ध की परिणति स्नातकोत्तर की उपाधि है, जैसे कि एमएस/एमटेक : एम एस सी/एम फिल इत्यादि हैं। शोध प्रबन्ध की परिणति डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) होती है।

    शोध प्रबन्ध लेखन प्रारूप 

    Dissertation Writing Format

    किसी भी शोध प्रबन्ध लेखन के प्रारूपों को मुख्यतः तीन भागों में बाँटकर अध्ययन किया जाता है

    1. प्रथम भाग या मूल भाग में शोध प्रबन्ध की प्राथमिकताएँ; जैसे-मुख पृष्ठ (Title Page), अनुमोदन पत्र (Approval Letter), विषयवस्तु सारणी, (Table of Content), प्राक्कथन (Preface), तालिका सूची (Lest of Table), ग्राफ और चित्र तालिका (List of Graph and Figure) एवं अन्त में निष्कर्ष (Conclusion) प्रस्तुत किए जाते हैं।

    2. द्वितीय भाग शोध प्रबन्ध का प्रमुख भाग होता है। इस हिस्से में भूमिका (Introduction) एवं सम्बन्धित साहित्य का सर्वेक्षण (Review of Related Literature) किया जाता है। इसके अतिरिक्त शोध अभिकल्प (Research Design), प्रदत्त विश्लेषण (Analysis of Data and Interpretation) एवं विवेचना के अति शोध उपलब्धि, निष्कर्ष एवं सामान्यीकरण (Research Achievement Conclusion and Generalisation) के साथ-साथ शोध प्रबन्ध के लिए सुझाव एवं संस्तुति (Suggestion and Recommendation) समाहित होता है।

    3. शोध प्रबन्ध के तृतीय भाग में सन्दर्भ ग्रन्थों की सूची, (Reference Bibliography), परिशिष्ट (Appendix) एवं अनुक्रमणिका (Index) का उल्लेख होता है।


    शोध प्रबन्ध लेखन का फॉर्मेट और सन्दर्भ की शैली 

    Format and Style of Thesis Writing

    भूमिका (Introduction) शोध प्रबन्ध का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय जो सम्पूर्ण अध्ययन सम्बन्धी विवरण प्रस्तुत करता है।

    मुख पृष्ठ (Title Page) शोध प्रबन्ध का मुख पृष्ठ सम्पूर्ण स्वरूप की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

    प्राक्कथन (Preface) इसमें विभिन्न व्यक्तियों, संस्थाओं, परिवारजनों तथा विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कर्मचारी वर्गों के प्रति आभार प्रदर्शित किया जाता है।

    तालिका सूची (List of Table) तालिका सूची में विभिन्न अध्यायों के अन्तर्गत आने वाली तालिकाओं को उनके उपयुक्त क्रमांक के साथ अंकित किया जाता है।

    अनुमोदन पत्र (Approval Letter) इसके द्वारा पर्यवेक्षकों, परामर्श समितियों द्वारा शोधार्थी के कार्यों एवं उपाधि के सम्बन्ध में प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है।

    अनुक्रमणिका (Index) शोध प्रबन्ध लेखन के पश्चात् पाठ्यसूची का निर्माण जिसे सावधानीपूर्वक वर्णमाला क्रम के अनुसार तैयार करना चाहिए।

    सन्दर्भ सूची एवं अनुक्रमणिका (Reference Bibliography and Index) शोधकर्ता के शोध कार्य में प्रयोग की जाने वाली सभी पुस्तकों, सामयिक पत्र पत्रिकाओं, शोध पत्र एवं प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से संकलित समस्त सामग्रियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत होता है। कोई भी शोधकर्ता अपने अनुसन्धान में दो प्रकार की साक्ष्य सामग्री प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों का उपयोग करता है। प्राथमिक स्रोतों में मूल पुस्तक, शोध पत्र, पाण्डुलिपियों, मूल लेख, इण्टरनेट, मैनुअल्स इत्यादि शामिल हैं। द्वितीयक स्रोतों में, इयर बुक्स, एब्सट्रेक्टस, एनसाइक्लोपीडिया अनुवादित पुस्तकें, सम्पादित ग्रन्थ आदि शामिल होती हैं।

    शोध अभिकल्प (Research Design) इसमें शोध को संगठित एवं व्यवस्थित रूप से सम्पन्न करने की रूपरेखा प्रस्तुत की जाती है। शोध अभिकल्प में प्रदत्त फलांकन विधि, उपकरण चयन, न्यादर्श चयन, प्रायोगिक अभिकल्प, सांख्यिकीय विधियों को शामिल किया जाता है।

    शोध उपलब्धि (Research Achievement) यह शोध का अन्तिम भाग होता है, जिसमें सम्पूर्ण शोध का सार समाहित होता है एवं उद्देश्यों की प्राप्ति किस सीमा तक होती है, इसका वर्णन भी किया जाता है।

    परिशिष्ट (Appendix) पुस्तक, लेख का अन्तिम भाग जिसमें उपयोगी तथ्य विद्यमान रहते हैं। इसमें प्रश्नावली, स्मृति पत्र, साक्षात्कार पत्र, मानचित्र, प्रपत्र आदि आते हैं।


    शोध प्रबन्ध लेखन के आवश्यक बिन्दु

    Important Points of Thesis Writing

    शोध प्रबन्ध का लेखन कार्य सृजनात्मक रूप से होना चाहिए, जिसमें विचारों की अभिव्यक्ति स्पष्ट एवं सरल हो। इस कारण निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है

    • लेखन में शुरू से अन्त तक सभी क्रियाओं की प्रवाहमय प्रस्तुति होनी चाहिए, ताकि उनमें क्रमबद्धता बनी रहे।
    • भाषा तथा प्रस्तुतीकरण वैज्ञानिक आधार पर होना चाहिए।
    • शोध प्रबन्ध सदैव अन्य पुरुष (शोधकर्ता) में लिखा जाता है तथा आभार प्रदर्शन को प्रथम पुरुष में लिखा जाता है।
    • शोध प्रबन्ध के मुख्य अंग में किसी विद्वान के नाम से पूर्व श्री, श्रीमती का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
    • शोध प्रबन्ध को साधारणतः भूतकाल में लिखना चाहिए।
    • शोध प्रबन्ध लेखन के समय तथा टंकण (Typing) में लेखन तकनीकी का प्रयोग समुचित तरीके से करना चाहिए।

    शोध प्रतिवेदन की विषय-वस्तु

    Content of Thesis Writing

    एक शोध प्रबन्ध लेखन में निम्न विषय वस्तु का समावेश होना अनिवार्य है

    शोध का परिचय (Research Introduction) शोध परिचय में शोध की प्रकृति, उसका उद्देश्य, समंकों का क्षेत्र तथा शोध अध्ययन की विषय वस्तु का उल्लेख किया जाता है।

    शोध परिकल्पना (Research Hypothesis) इसमें शोध कार्यों को आगे बढ़ाने वाली परिकल्पनाओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया जाता है।

    शोध कार्यविधि (Research Methodology) इसमें शोध से सम्बन्धित सभी विधियों एवं पद्धतियों के संक्षिप्त विवेचन का प्रस्तुतीकरण किया जाता है।

    इकाई (Unit) शोध अध्ययन में इकाई भाग में प्रत्येक इकाई की सुनिश्चित एवं स्पष्ट विवेचना प्रस्तुत की जाती है। सम्पूर्ण शोध प्रबन्ध को विभिन्न इकाइयों में बाँट दिया जाता है।

    समंकों का विश्लेषण इसके पश्चात् समंकों का प्रयोगात्मक विवेचन कर उसकी संक्षिप्त रूपरेखा का वर्णन करता है एवं समंकों के परीक्षण की कार्यविधि प्रस्तुत की जाती है।

    परिणाम (Result) इसमें शोध अध्ययन से प्राप्त परिणामों का समग्रता से उल्लेख किया जाता है।

    निष्कर्ष (Conclusion) सम्पूर्ण शोध तथा उसके परिणामों का विश्लेषण कर उसका निष्कर्ष प्रस्तुत किया जाता है।

    शोध टिप्पणी (Research Comment) समंकों का एकत्रण, वर्गीकरण, सारणीयन, संकेतन से सम्बन्धित समस्याओं के साथ-साथ एकत्रित समंकों में सम्भावित दोष, हानि, त्रुटियों तथा शोध समस्याओं के समाधान के बारे में टिप्पणी प्रस्तुत की जाती है।

    सन्दर्भ सूची (Reference Bibliography) शोध के अध्ययन में प्रयुक्त हुए समस्त प्रलेखों, ग्रन्थों पुस्तकों एवं समाचार पत्रों का सन्दर्भ सूची में उल्लेख किया जाता है।

    परिशिष्ट (Appendix) इसमें प्रश्नावलियों की अनुसूची, सूचनादाताओं का परिचय, कठिन एवं जटिल शब्दों का संक्षिप्त रूप तथा चार्ट, नक्शों का विवरण शामिल किया जाता है।


    शोध प्रबन्ध लेखन की विशेषताएँ

    • शोध प्रबन्ध, शोध का ऐसा स्वरूप है, जिसमें समस्याओं के केवल सैद्धान्तिक अध्ययन पर ही बल नहीं दिया जाता है, बल्कि इसमें व्यावहारिक अध्ययन पर भी बल दिया जाता है।
    • इसका उ‌द्देश्य व्यावहारिक समस्याओं के साथ-साथ उद्योगों में भी सुधार लाना है।
    • शोध प्रबन्ध में घटनाओं की वस्तुस्थिति को समझकर उनके तथ्यों का अध्ययन करके उन तथ्यों के आधार पर व्यावहारिक समस्या के हल के लिए प्रयत्न करना होता है।
    • शोध प्रबन्ध में अनुसन्धान के सैद्धान्तिक पक्ष की अपेक्षा व्यावहारिक पक्ष प्रभावी होता है।
    • चूंकि शोध प्रबन्ध में व्यावहारिक समस्याओं के हल का प्रयत्न किया जाता है, अतः कार्यकर्ता की वास्तविक रुचि और सक्रियता की आवश्यकता होती है।
    • शोधकर्ताओं को लेखन तथा विवरणों को प्रस्तुत करने की शैली एवं कला दोनों का ज्ञान होना चाहिए। इस शैली का विकास निरन्तर अभ्यास तथा अध्ययन से ही होता है।

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