संप्रेषण (Communication): अर्थ, परिभाषाएँ, प्रकार, प्रक्रिया, मॉडल एवं महत्व

मनुष्य के द्वारा विभिन्न प्रकार की जानकारी अलग-अलग माध्यमों से प्राप्त की जाती है। यह कार्य संप्रेषण के द्वारा ही सम्भव हो पाता है। मनुष्य अपने विचारों को दूसरों तक पहुँचाने तथा दूसरों के विचारों को समझने के लिए संप्रेषण पर निर्भर होता है। संप्रेषण के माध्यम से ही समाज में साहचर्य बनता है तथा विचारों का आदान-प्रदान होता है। अतः हमारे जीवन में संप्रेषण की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

संप्रेषण (Communication) मनुष्य के सामाजिक, व्यक्तिगत और संगठनात्मक जीवन की एक अनिवार्य प्रक्रिया है। इस पोस्ट में संप्रेषण के अर्थ, परिभाषाएँ, प्रकृति, उद्देश्य, तत्त्व, कार्य एवं प्रकारों का विस्तृत विवेचन किया गया है। साथ ही औपचारिक-अनौपचारिक संप्रेषण, लम्बवत, क्षैतिज, तिर्यक, अन्तर-वैयक्तिक एवं जनसंचार का स्पष्ट वर्णन प्रस्तुत है। इसके अतिरिक्त संप्रेषण प्रक्रिया, शोर, फीडबैक तथा रेखीय, ट्रांजैक्शनल और इंटरएक्शनल मॉडल को सरल भाषा में समझाया गया है। यह सामग्री B.Ed., M.Ed., MA, UGC NET, प्रतियोगी परीक्षाओं एवं शिक्षाशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Communication in Hindi

    संप्रेषण का अर्थ

    Meaning of Communication

    संचार अथवा संप्रेषण दो शब्दों- सम् तथा प्रेषण से बना है, जिसका अर्थ है 'समान रूप से प्रेषित किया गया।' इसका अंग्रेजी रूपान्तरण Communication' है, जिसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द 'Communis' व 'Communicare' शब्द से हुई है।

    'Communis' शब्द का अर्थ आदान-प्रदान करना है। अतः संप्रेषण दो या अधिक व्यक्तियों के मध्य सूचनाओं, सन्देशों तथा विचारों का आदान-प्रदान है, जो लिखित, मौखिक तथा सांकेतिक हो सकता है। संप्रेषण प्रक्रिया में सन्देश भेजने वाला व्यक्ति प्रेषक (Sender) तथा सन्देश प्राप्त करने वाला व्यक्ति प्राप्तकर्ता (Receiver) कहलाता है।

    संप्रेषण की परिभाषाएँ

    Definitions of Communication

    लिटिल के अनुसार, "मानव संप्रेषण वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा जानकारी (या सूचना) पहले से ही सम्मत प्रतीकों (Agreed Symbols) के माध्यम से लोगों के बीच पारित की जाती है तथा वांछित प्रतिपुष्टि प्राप्त करना भी इसका 'लक्ष्य होता है।"

    एफ. जी. मेयर के अनुसार, "मानवीय विचारों और सोचों को शब्दों, पत्रों एवं सन्देशों के माध्यम से आदान प्रदान करना ही संप्रेषण है।"

    थीयो हैमान के अनुसार, "संप्रेषण वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सूचना व सन्देश एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचे। संप्रेषण मनुष्य को जानने व बताने की जिज्ञासा की पूर्ति करता है।"


    संप्रेषण की प्रकृति 

    Nature of Communication

    संप्रेषण की प्रक्रिया को कला एवं विज्ञान दोनों ही स्तर पर स्वीकार किया जाता है, क्योकि कला को अभ्यास पर तथा ज्ञान को वैज्ञानिक विधियों पर आधारित किया जाता है। अतः संप्रेषण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए क्रमबद्ध ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रस्तुत करने की अभिव्यक्ति भी आवश्यक है, जिसको अभ्यास द्वारा प्रभावी बनाया जाता है। इसी के आधार पर संप्रेषण को पुरानी कला और नग्या विज्ञान कहा जाता है। संप्रेषण की प्रकृति को निम्नलिखित रूपों के अन्तर्गत समझा जा सकता है

    • संप्रेषण सामाजिक सम्बन्धों को स्थापित करने वाली क्रिया है।
    • एक प्रभावशाली संप्रेषण आकर्षक व्यक्तित्व की अपेक्षा नहीं करता।
    • संप्रेषण एक प्रबन्धकीय कार्य है। इसके अन्तर्गत प्रतिभागियों का चयन सान्निध्य, उपयोगिता आदि कारकों द्वारा प्रभावित होता है।
    • संप्रेषण अपने अन्दर कला एवं विज्ञान दोनों ही तत्त्वों को समाहित किए हुए रहता है।
    • संप्रेषण एकमार्गी तथा द्विमार्गी दोनों ही प्रकार का हो सकता है।
    • सड़कों पर नाटकों का आयोजन एकमार्गी तथा जनसभाएँ, पदयात्रा, प्रदर्शन तथा रैली द्विमार्गी संप्रेषण प्रक्रिया के उदाहरण हैं।


    संप्रेषण के तत्त्व

    Elements of Communication

    संप्रेषण के तत्त्व निम्नलिखित हैं

    • स्पष्टता (Clarity) संप्रेषण स्पष्ट रूप से आरम्भ होना चाहिए।
    • सततता (Consistency) संप्रेषण सतत तथा सन्देश प्राप्तकर्ता के अनुरूप होना चाहिए।
    • पर्याप्तता (Adequacy) संप्रेषण में सूचना या सन्देश पर्याप्त होना चाहिए।
    • सामयिकता (Timeliness) संप्रेषण समय से आरम्भ होना चाहिए।
    • एकरूपता (Uniformity) संप्रेषण के अन्तर्गत एकरूपता होनी चाहिए।
    • लचीलापन (Flexibility) संप्रेषण का गुण दृढ़ता युक्त या कठोर (Rigidity) नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सरल एवं लचीला होना चाहिए।
    • स्वीकार्यता (Acceptability) संप्रेषण प्राप्तकर्ता के लिए स्वीकार्य होना चाहिए तथा उसकी अनुक्रिया (Response) सकारात्मक होनी चाहिए।


    संप्रेषण के उद्देश्य

    Objectives of communication

    संप्रेषण एक उद्देश्यात्मक प्रक्रिया है, इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

    • किसी संस्था में कार्यरत कर्मचारियों को उनके कार्यों के सम्बन्ध में स्पष्ट एवं उपयुक्त आदेश एवं सूचनाएँ प्रदान करना।
    • श्रम संगठन की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करना।
    • कर्मचारियों को किसी विशेष परिवर्तन हेतु तैयार रहने के लिए पहले से ही आवश्यक सूचनाएं देना। श्रमिकों के मध्य सामाजिक सम्बन्धों को प्रोत्साहित तथा कार्य हेतु अभिप्रेरित करना।
    • संस्था की नीतियों एवं योजनाओं से सम्बन्धित कार्यक्रमों से कर्मचारियों को अवगत कराना।
    • विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा कार्य निष्पादन रिकॉर्ड द्वारा संप्रेषण की प्रभावशीलता का पता लगाना।
    • औपचारिक तथा अनौपचारिक रूप से व्यक्तिगत एवं सामूहिक स्तर पर नियन्त्रण स्थापित करना।


    संप्रेषण के कार्य

    संप्रेषण के कार्यों को चार भागों में वर्गीकृत किया जाता है, जो निम्न प्रकार हैं

    1. व्यक्तिगत सन्दर्भ में -

    • यह ज्ञान के लिए विषय-वस्तु उपलब्ध कराता है।
    • यह सफलता के लिए मार्ग का निर्धारण करता है।
    • यह व्यक्ति के व्यक्तित्व को निर्धारित करता है।
    • यह व्यक्ति को सामाजिक बनाने में सहायता करता है।

    2. सामाजिक सन्दर्भ में -

    • यह समाज में परिवर्तन लाने में सहायक है।
    • यह व्यक्तियों को शिक्षित कर कार्य करने में समर्थ बनाता है।
    • यह आकस्मिक कार्य प्रणाली में सहायता करता है।

    3. मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में - 

    • यह व्यक्ति की वृद्धि के लिए अच्छा पर्यावरण उपलब्ध कराता है।
    • यह समूह में मनोबल को बढ़ाता है।
    • संगठन में लोगों को कुशल कार्य के लिए अभिप्रेरित करता है।
    • यह समन्वय स्थापित करने में प्रोत्साहन देता है।

    4. भौतिक सन्दर्भ में - 

    • यह ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहाँ लोग एक-दूसरे से संप्रेषण कर सकें।
    • यह लोगों को व्यवहार नियन्त्रण हेतु उपकरण उपलब्ध कराता है।


    संप्रेषण के प्रकार

    Types of communication

    संप्रेषण को मुख्यतः निम्न भागों में विभाजित किया जाता है

    1. औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication)

    प्रत्येक संगठन में औपचारिक संप्रेषण प्रणाली का अनुसरण किया जाता है। इसे अधिकारिक संप्रेषण भी कहा जाता है। इस संप्रेषण के अन्तर्गत प्रेषक (Sender) अधिक प्रभावी होता है। प्रत्येक संगठन के लिए औपचारिक संप्रेषण आवश्यक है तथा इसकी कार्यप्रणाली पूर्व निर्धारित होती है।

    औपचारिक संप्रेषण के नेटवर्क छः प्रकार के होते हैं :-

    (i) श्रृंखला नेटवर्क (Chain Network) - इस प्रकार के संप्रेषण नेटवर्क के अन्तर्गत दो व्यक्तियों के मध्य संप्रेषण किया जाता है। इस संप्रेषण में कार्य की गति उच्च होती है तथा कार्य परिशुद्धता अधिक होती है और कार्य सन्तुष्टि कम होती है। प्रजातान्त्रिक प्रणाली में इसका उपयोग कम होता है।

    (ii) तारा सम्पादक (Star Network) - इस प्रकार के संप्रेषण के अन्तर्गत किसी संस्था में कार्य करने वाले अधीनस्थ कर्मचारी संप्रेषण के लिए अपने उच्च अधिकारी से सम्बद्ध रहते हैं। इस नेटवर्क के अन्तर्गत नेतृत्व महत्त्वपूर्ण भूमिका में होता है, किन्तु इसमे कार्य सन्तुष्टि कम होती है। यह संप्रेषण की प्रजातान्त्रिक शैली के अन्तर्गत नहीं आता है।

    Types of communication

    (iii) वृत्त संप्रेषण नेटवर्क (Circle Communication Network) - इस प्रकार के संप्रेषण नेटवर्क के अन्तर्गत कुछ व्यक्तियों की स्थिति इस प्रकार होती है कि वे एक-दूसरे से संप्रेषण करते हैं। इस संप्रेषण नेटवर्क के अन्तर्गत कार्य की गति मन्द, नेतृत्व कमजोर तथा कार्य मृन्तुष्टि अधिक होती है। इस नेटवर्क का उपयोग राउण्ड टेबल कॉन्फ्रेन्स आदि में किया जाता है।


    (iv) सभी मार्ग नेटवर्क (All Channel Network) - इस प्रकार के संप्रेषण नेटवर्क के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से बात कर सकता है। इस नेटवर्क में प्रेरणा अधिक होती है, किन्तु इसमें नेतृत्व कमजोर पाया जाता है। इसके अन्तर्गत विकेन्द्रीकरंण -(Decentralization) अधिक होता है।


    (v) Y-आकार का संप्रेषण (Y-shapped Communication) - इस प्रकार के संप्रेषण को योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है, जिसके कारण इसका प्रभाव कई विभागों पर होता है। अतः यह नेटवर्क अन्तर्विभागीय स्तर पर प्रचलित होता है।


    (vi) उल्टा- संप्रेषण (Inverted-v Communication) - किसी संगठन मैं जब एक ही स्तर के अधिकारियो तथा अधीनस्थों के मध्य विश्वास का अभाव होता है तब इस नेटवर्क का प्रयोग होता है। इस नेटवर्क का प्रभाव प्रशासन में अधिक होता है।


    2. अनौपचारिक संप्रेषण (Informal Communication)

    प्रत्येक संगठन में औपचारिक संप्रेषण प्रणाली के साथ साथ अनौपचारिक संप्रेषण प्रणाली भी विद्यमान होती है। यह संप्रेषण विभागों के सदस्यों के बाँच सम्बन्धों पर आधारित होता है। इसके अन्तर्गत मानवीय व्यवहारों पर अधिक बल दिया जाता है। इसलिए इसे मानवतावादी संगठन भी कहा जाता है। इसे दाखलता या अंगूरलता (ग्रेपवाइन) संप्रेषण भी कहा जाता है। इस संप्रेषण को समाप्त नहीं किया जा सकता। इस संप्रेषण के निम्नलिखित चार प्रकार है


    (i) एकल श्रृंखला नेटवर्क (Single Chain Network) - इस प्रकार की श्रृंखला के अन्तर्गत एक व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से मध्यवर्ती व्यक्ति के द्वारा संप्रेषण करता है। अतः इस प्रकार के नेटवर्क में संप्रेषण सीधी रेखा से होकर गुजरता है।


    Types of communication

    (ii) गॉसिप/अंगूरलता नेटवर्क (Gossip/Grapevine Network) - इस प्रकार के नेटवर्क के अन्तर्गत किसी एक व्यक्ति द्वारा अन्य सभी व्यक्तियों को सन्देश दिया जाता है। इस नेटवर्क में प्रेषक (Sender) की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है, क्योकि वह गॉसिप के माध्यम से एक साथ अनेक लोगों से बात कर सकता है।


    (iii) प्रायिकता/सम्भाव्यता नेटवर्क (Probability Chain Network) - यह नेटवर्क प्रायिकता के सिद्धान्त (Probability Theory) से प्रभावित है। इसके अन्तर्गत किसी सन्देश को आकस्मिक रूप से व्यक्त किया जाता है जिसका परिणाम यह होता है कि सन्देश कुछ व्यक्तियों को प्राप्त होता है और कुछ को नहीं होता।


    (iv) झुण्ड/गुच्छ नेटवर्क (Cluster Network) - इसके अन्तर्गत कुछ व्यक्तियों का चयन करके अन्य व्यक्तियों को सन्देश दिया जाता है। इस प्रकार सूचना सदस्यों तक शीघ्रता से पहुँच जाती है। संप्रेषण प्रणाली में यह एक महत्त्वपूर्ण व्यावहारिक प्रणाली है।


    संप्रेषण के अन्य प्रकार

    संप्रेषण के अन्य प्रकार निम्नलिखित है

    1. लम्बवत् संप्रेषण (Vertical Communication)

    इस प्रकार की संप्रेषण प्रक्रिया नीचे से ऊपर की ओर तथा ऊपर से नीचे की ओर चलती है, जिसमें उच्च अधिकारी एवं अधीनस्थ कर्मचारियों की संप्रेषण प्रक्रिया सम्मिलित है।

    Types of communication

    2. क्षैतिज संप्रेषण (Horizontal Communication)

    किसी संगठन के एक ही स्तर के व्यक्तियों द्वारा किए गए संप्रेषण को क्षैतिज संप्रेषण कहते हैं। इस प्रकार की संप्रेषण व्यवस्था का प्रयोग किसी समस्यों के शीघ्र समाधान एवं निर्णय लेने के लिए किया जाता है। जिन संगठनों में विभागीय निर्भरता अधिक होती है, वहाँ क्षैतिज संप्रेषण का प्रयोग अधिक किया जाता है।

    3. तिर्यक संप्रेषण (Diagonal Communication)

    तिर्यक संप्रेषण व्यवस्था में विपरीत स्तर के अधिकारी एवं कर्मचारी एक-दूसरे से सम्पर्क करते हैं। इस संप्रेषण प्रक्रिया के अन्तर्गत जुड़े व्यक्तियों के मध्य कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं होता। इस प्रकार का संप्रेषण अलग-अलग विभागों एवं स्तरों के बीच होता है। इस संप्रेषण के द्वारा वांछित उद्देश्यों की प्राप्ति कम समय में सरलता से हो जाती है साथ ही साहचर्य की भावना का भी विकास होता है।

    4. अन्तः वैयक्तिक संप्रेषण (Inter-Personal Communication)

    यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो स्वयं के आत्मचिन्तन एवं विचार पर आधारित होती है। कुछ भी करने और कहने से पूर्व मन में उठने वाले विचार संवाद का रूप ले लेते हैं। इसमें सन्देश प्रेषक एवं प्राप्तकर्ता एक ही व्यक्ति होता है। इसके अन्तर्गत मनुष्य आत्मविश्लेषण, दूसरों के, व्यवहार का मूल्यांकन, समस्या का निराकरण आदि करता है जैसे-कभी-कभी हम अपने आत्मसम्मान में वृद्धि तथा विश्वास को बढ़ाने के लिए स्वयं से संप्रेषण करते हैं। इसी प्रकार बेरोजगार व्यक्ति नौकरी प्राप्त करने के लिए स्वयं से संप्रेषण करता है। विद्यार्थी सदैव अच्छे अंक लाने के लिए स्वयं से संप्रेषण करता है। इस संप्रेषण के द्वारा व्यक्ति में विश्वास, नैतिक मूल्य, अभिवृत्ति का जन्म एवं विकास होता है।

    5. अन्तर-वैयक्तिक संप्रेषण (Intra-Personal Communication)

    इस प्रकार का संप्रेषण प्रायः दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य विचारों तथा सूचनाओं के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आदान प्रदान के लिए होता है। अन्तर वैयक्तिक संप्रेषण सामाजिक सम्बन्धों पर आधारित होता है। इसके अन्तर्गत दो या दो से अधिक लोगों के मध्य अन्तःक्रिया होना अनिवार्य है। इसमें संचारक को जल्दी फीडबैक मिलने लगता है।

    साक्षात्कार, कार्यालयी वार्तालाप, समाचार संकलन आदि अन्तर वैयक्तिक संप्रेषण के उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त, ई-मेल, सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर चैटिंग भी इसी के अन्तर्गत आते हैं।

    6. जन संप्रेषण (Mass Communication)

    संप्रेषण प्रक्रिया में जनसंचार सर्वाधिक प्रभावी एवं व्यापक प्रक्रिया मानी जाती है। किसी भी व्यक्ति या संगठन में स्वयं के विचारों को अधिक व्यक्तियों तक एक ही समय में पहुंचाने के लिए जनसंचार उपयुक्त उपाय है। इस प्रकार का संप्रेषण समाचार पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन, विज्ञान, सिनेमा, साहित्य एवं वीडियो के माध्यम से किया जाता है।


    संप्रेषण के अभिलक्षण 

    Features of Communication

    संप्रेषण के अभिलक्षण निम्नलिखित है

    • संप्रेषण एकमार्गी (One Way) एवं द्विमार्गी (Two Way) प्रक्रिया है।
    • संप्रेषण एक गतिशील प्रक्रिया है।
    • संप्रेषण के द्वारा ही प्रेषक एवं प्राप्तकर्ता के व्यवहार नियन्त्रित एवं प्रभावित होते हैं।
    • संप्रेषण के माध्यम से ही किसी विशेष लक्ष्य की प्राप्ति की जाती है।
    • संप्रेषण सम्पूर्ण विश्व में विचारो तथा भावनाओं को प्रस्तुत करने का माध्यम है। अतः यह सार्वभौमिक (Universal) है।
    • संप्रेषण सामाजिक वातावरण से सम्बन्धित एवं प्रभावित होता है।
    • संप्रेषण संगठन का मुख्य आधार है, इसीलिए इसे संगठन
    • का तन्त्रिका तन्त्र भी कहा जाता है।
    • संप्रेषण एक स्वाभाविक एवं प्राकृतिक गुण है।
    • संप्रेषण को प्रभावी बनाने के लिए अनेक माध्यम; जैसे-समाचार पत्र, इण्टरनेट, टेलीफोन आदि का प्रयोग किया जाता है।
    • संप्रेषण शाब्दिक (Verbal) और अशाब्दिक (Non-verbal) दोनों प्रकार का हो सकता है।
    • संप्रेषण के द्वारा हुए प्रत्येक संप्रेषक को प्रत्याशित उत्तेजना का अनुभव होता है।


    संप्रेषण के मॉडल 

    Models of Communication

    सामान्यतः संप्रेषण के तीन प्रमुख मॉडल हैं, जो निम्नलिखित है

    1. संप्रेषण का रेखीय मॉडल

    Linear Model of Communication

    संप्रेषण का रेखीय मॉडल एक तरफा प्रक्रिया है जहाँ प्रेषक (Sender) केवल सन्देश संप्रेषित करता है तथा प्राप्तकर्ता (Receiver) केवल सन्देश ग्रहण करता है।

    • इसमे प्राप्तकर्ता कोई फीडबैक अथवा प्रतिक्रिया नहीं देता है। इसमें सन्देश को
    • ध्वनि के माध्यम से संप्रेषित किया जाता है। इस मॉडल में प्रेषक की भूमिका प्रमुख होती है।
    • रेखीय मॉडल की स्थापना अरस्तू, शैनन व वेबर द्वारा
    • की गई थी जिसे बाद में डेविड बेरलों ने अपने मॉडल एस. एम. सी. आर. (SMCR) के रूप में अपना लिया। यहाँ SMCR से तात्पर्य Source, Message, Channel, Receiver से है!
    • रेखीय मॉडल को संप्रेषण के ट्रांसमिशन मॉडल के नाम से भी जाना जाता है। इस मॉडल का प्रयोग, जन संचार यथा-टी.वी., रेडियो इत्यादि में होता है।


    2. संप्रेषण का ट्रांजैक्शनल मॉडल

    Transactional Model of Communication

    • संप्रेषण के इस मॉडल में प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच सन्देश का आदान-प्रदान होता है: जहाँ दोनों में प्रत्येक सन्देश प्रेषक और प्राप्तकर्ता की भूमिका में होता है।
    • संप्रेषण के इस मॉडल में प्रेषक (Sender) एवं प्राप्तकर्ता (Receiver) दोनों क्रियाएँ एक ही समय पर होती है।
    • इस मॉडल का प्रयोग मुख्यतः अन्तु यिक्तिक संप्रेषण के लिए किया जाता है तथा इसे संप्रेषणा का परिपत्र मॉडल भी कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि प्राप्तकर्ता प्रेषक को नहीं सुनता है, तो ट्रांजैक्शनल संप्रेषण की क्रिया सम्भव नहीं होगी।
    • टांजैक्शनल मॉडल संप्रेषण मॉडल का सामान्य और प्रमुख मॉडल है क्योकि प्रतिदिन बातचीत और अन्तक्रिया भी रांजैक्शनल संप्रेषण मॉडल के रूप में होती है।
    • यह समान वातावरण और व्यक्तिगत अपेक्षाओं के साथ संप्रेषक के लिए अधिक प्रभावी होता है।

    3. संप्रेषण का इंटरएक्शनल मॉडल 

    Interactional Model of Communication

    • संप्रेषण का इंटरएक्शनल मॉडल संप्रेषण को एक प्रक्रिया के रूप में वर्णित करता है, जिसमें प्रतिभागी प्रेषक और प्राप्तकर्ता के रूप में वैकल्पिक भूमिका (पदो पर) में होते हैं और सन्देश भेजकर भौतिक तथा मनोवैज्ञानिक सन्दर्भों में प्रतिक्रिया प्राप्त कर उसका अर्थ निकालते हैं।
    • संप्रेषण को रेखीय, एक तरफा प्रक्रिया के रूप में दर्शाने के बजाय, इंटरएक्शनल मॉडल में फीडबैक शामिल होता है,
    • जो संप्रेषण को एक अधिक संवादात्मक, दो तरफा प्रक्रिया बनाता है। उदाहरण के लिए, एक शिक्षक उस बिन्दु पर प्रतिक्रिया दे सकता है जो छात्र द्वारा कक्षा में चर्चा के दौरान उठाया जाता है या कोई व्यक्ति सोफे पर इंगित कर सकता है, जब उसका रूम मेट पूछता है कि रिमोट कण्ट्रोल कहाँ है?
    • विलबर, कैम (Schramm) ने इंटरएक्शनल मॉडल का समर्थन किया है। इस मॉडल में दो प्रेषक और प्राप्तकर्ता होते हैं, जो सन्देश का आदान-प्रदान करते है। प्रत्येक प्रतिभागी प्रेषक और प्राप्तकर्ता के रूप में संप्रेषण की क्रिया को जारी रखने के लिए वैकल्पिक की भूमिका में होते हैं। हालांकि, यह एक बोधगम्य और जानबूझकर चलने वाली प्रक्रिया की तरह लगता है, हम प्रेषक और प्राप्तकर्ता की भूमिकाओं के बीच बहुत शीघ्र और प्रायः बिना सोचे समझे कार्य करते हैं।


    संप्रेषण प्रक्रिया 

    Communication Process 

    प्रभावी संप्रेषण प्रक्रिया कुछ महत्त्वपूर्ण प्रक्रम द्वारा सम्पन्न होती है, जिनका विवरण निम्न प्रकार है

    प्रेषक/स्रोत (Sender/Source) यह संप्रेषण प्रक्रिया का प्रारम्भिक बिन्दु है। यह वह व्यक्ति एवं समूह विशेष है, जो अपनी भावनाओं तथा विचारों को किसी दूसरे व्यक्ति या समूह तक पहुँचाता है। अतः प्रेषक ही संप्रेषण प्रक्रिया को आरम्भ करता है।

    संकेतन/एनकोडिंग (Encoding) प्रेषक द्वारा जो सन्देश भेजे गए हैं उन्हें प्रयुक्त संकेतों में रूपान्तरित करना ही संकेतन है।

    सन्देश (Message) सन्देश से तात्पर्य उस सूचना एवं विचार से है, जो प्रेषक (Sender) द्वारा संवाद प्राप्तकर्ता (Receiver) को प्रेषित किंया जाता है। यह मौखिक, लिखित, सांकेतिक आदि किसी भी प्रकार का हो सकता है।

    माध्यम (Medium) माध्यम वे साधन है, जिसके द्वारा प्रेषक अपने विचारों को दूसरों तक पहुंचाने के लिए प्रयोग करता है।

    कूटानुवाद (Decoding) किसी सन्देश को अर्थपूर्ण सन्देश में परिवर्तित करना ही कूटानुवाद है।

    प्राप्तकर्ता (Receiver) प्रेषक (Sender) द्वारा प्रेषित किए गए विचार को जो व्यक्ति या समूह ग्रहण करता है, उसे प्राप्तकर्ता (Receiver) कहा जाता है। यह संप्रेषण प्रक्रिया में दूसरा महत्त्वपूर्ण बिन्दु होता है।

    प्रतिपुष्टि (Feedback) यह संप्रेषण प्रक्रिया का अन्तिम चरण है। सन्देश प्राप्तकर्ता की सन्देश के प्रति क्रिया या प्रतिक्रिया ही प्रतिपुष्टि कहलाती है। 

    शोर (Noise) वह बाधा जो प्राप्तकर्ता द्वारा सन्देश प्राप्त करने में हस्तक्षेप करती है, शोर प्रणाली है।


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