जन-मीडिया एवं समाज विषय में मीडिया के अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य और कार्य-क्षेत्र का अध्ययन किया गया है। प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन तथा डिजिटल माध्यम सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के प्रमुख साधन हैं। सोशल मीडिया जैसे YouTube, Facebook, Twitter और WhatsApp ने समाज पर व्यापक प्रभाव डाला है। साथ ही प्रसार भारती, आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे संस्थान जनसंचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस लेख में जन-मीडिया एवं समाज के बारे में विस्तार से दर्शित किया गया है।
जन-मीडिया एवं समाज
Mass Media and Society
सामाजिक परिवर्तन के सर्वश्रेष्ठ वाहक के रूप में मीडिया लोगों की चेतना को जागृत कर उन्हें एक लक्ष्य प्रदान कर रही है। वर्तमान समय में मीडिया में बढ़ता जा रहा उपभोक्तावाद निश्चित रूप से चिन्ता का विषय है, क्योंकि मीडिया का कार्य सिर्फ सूचना एवं मनोरंजन कराना ही नहीं, बल्कि लोगों को सभी क्षेत्रों में जागरूक करते हुए स्वच्छ और नैतिक जनमत तैयार करना भी है।
मीडिया और समाज में घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। तकनीकी के क्षेत्र में विकास होने से हमारे समाज में अवलोकन करने व सोच-विचार में काफी वृद्धि हुई है। इसमें सूचना पाने के तरीके व माध्यम काफी विकसित हुए हैं। भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में मीडिया की भूमिका हमेशा से ही महत्त्वपूर्ण रही है। इसलिए मीडिया को भारत में लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है।
मीडिया और समाज अपने विभिन्न क्रिया-कलापों से एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। मीडिया समाज के प्रत्येक क्रिया-कलाप को प्रस्तुत करता है और अपने प्रस्तुती के माध्यम से लोगों को अच्छाई-बुराई सच-झूठ से अवगत कराता है और समाज व देश के विकास हेतु प्रेरित करता है। इसलिए मीडिया को समाज का दर्पण भी कहा जाता है। यद्यपि कभी-कभी मीडिया द्वारा गलत सूचना देने के कारण समाज में तनाव व हिंसा की घटनाएँ होती हैं, जोकि मीडिया के नकारात्मक पक्ष को दर्शाती है। इसके बावजूद मीडिया हमेशा ही समाज को जागरूक कर देश की प्रगति के लिए प्रेरित करता है।
मीडिया का अर्थ
'मीडिया' शब्द लैटिन भाषा के शब्द मीडियम से बना है, इसका अर्थ माध्यम है। यह शब्द 'रिपोटर्स' को सम्बोधित नहीं करता है। वास्तव में जब प्रिण्ट, रेडियो एवं टेलीविजन की सामुहिक रूप से बात की जाती है तो यह मीडिया बन जाता है अर्थात् इसमें प्रिण्ट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों मीडिया शामिल हैं।
मीडिया, एक ऐसा माध्यम है. जिसके द्वारा सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। चूंकि मनुष्य स्वभाव से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति का रहा है एवं वह देश-दुनिया में घटित घटनाओं की जानकारी लेने में रुचि लेता है, अतः उसकी इसी प्रवृत्ति को उल्लेखनीय रूप से शान्त करने के लिए 'मीडिया' का जन्म हुआ। वर्तमान में इसका दायरा विस्तृत रूप ले चुका है।
मीडिया की परिभाषा
मीडिया की परिभाषा विभिन्न पत्रकारों एवं लेखकों ने निम्न परिभाषाएँ दी हैं
डेनिस मैक्वील के अनुसार, "मीडिया समाज परिवर्तन की यन्त्र शक्ति है।"
रश्मि बोहरा के अनुसार, "मीडिया समाज का दर्पण है।"
आर के मजूमदार के अनुसार, "मीडिया वह माध्यम है, जिसके द्वारा समाज शिक्षित होता है।"
कृष्ण कुमार के अनुसार, "मीडिया वह साधन है, जिसके द्वारा नागरिकों को उनके अधिकारों का आभास होता रहता है।"
मीडिया का उद्देश्य
मीडिया का मूल उद्देश्य सूचना देना, शिक्षित करना तथा मनोरंजन करना है। सम्पूर्ण मीडिया इन्हीं तीन उद्देश्यों के सार तत्त्वों को अपने भीतर समाहित किए हुए है।
मीडिया संप्रेषण का एक सशक्त माध्यम है। यह अपनी बहुमुखी प्रवृत्तियों के कारण व्यक्ति और समाज के जीवन की गहराई की अनुभूति कराता है। समाज का कोई भी पक्ष हो, राष्ट्र की कोई भी चिन्ता हो, वह मीडिया के द्वारा ही फलीभूत होती है।
यही वजह है कि सामाजिक, धार्मिक रूढ़ियों तथा आडम्बरों के विरुद्ध मीडिया निरन्तर संघर्ष करता है तथा लोकहित, लोक-कल्याण उसका प्रमुख पक्ष रहा है। वह जनता को शिक्षित करने से लेकर उस तक सच-झूठ की वास्तविकता को सामने लाने का सूत्रधार रहा है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में मीडिया का एक नया स्वरूप समाज में तीव्रगति से अपना प्रसार कर रहा है। मीडिया का यह नया स्वरूप है, सोशल मीडिया।
मीडिया का कार्य-क्षेत्र
1. सूचना उपलब्ध कराना - मीडिया का सर्वप्रथम कार्य जन-मानस तक सूचनाओं को उपलब्ध कराना है। सूचनाएँ समाज के विभिन्न मुद्दों पर आधारित हो सकती हैं, अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर की भी हो सकती है।
2. शिक्षित कराना - मीडिया का दूसरा महत्त्वपूर्ण कार्य लोगों को शिक्षित करना है। ऐसे कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं, जिनसे समाज में शिक्षा फैलती है। समाचार पत्र ऐसे आलेख प्रकाशित करते हैं. जो समाज से जुड़े होने के साथ-साथ समाज के सभी वर्ग को शिक्षित करता है।
3. मनोरंजन करना - मीडिया द्वारा सूचनाएँ एवं शिक्षा प्रदान करने के बाद तीसरा कार्य मनोरंजन करना होता है। लोगों का स्वस्थ मनोरंजन करना मीडिया का दायित्व है।
4. निगरानी करना - मीडिया का एक बड़ा कार्य निगरानी करना है। ये निगरानी ऐसे मामलों से सम्बन्धित है, जिनसे समाज दूषित होता है। भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करना, कुछ गलत होते देख, उसे जनता के सामने लाना मीडिया की 'निगरानी' कार्य-क्षेत्र के अन्तर्गत ही आता है।
5. विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना - मीडिया विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराता है। समाचार पत्रों में किसी विषय विशेष पर पाठकों की राय माँगी जाती है एवं साथ ही उस मुद्दे से जुड़े विशेषज्ञों की राय भी प्रकाशित की जाती है। इसके अतिरिक्त टीवी चैनलों पर सामूहिक चर्चा, वाद-विवाद का मंच उपलब्ध कराकर मीडिया लोगों को वैचारिक स्वतन्त्रता प्रदान करता है।
सोशल मीडिया: मीडिया की नवीन विद्या या प्रकार
Social Media : New Form of Media or Types
वर्तमान समय में मीडिया के नवीन रूप सोशल मीडिया को लोकप्रियता के शिखर पर देखा जा रहा है। इण्टरनेट के बढ़ते प्रयोग ने इस मीडिया को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। वर्तमान समय में यू-ट्यूब, ब्लॉग, फेसबुक, न्यूज पोर्टल, ट्विटर सरीखे सोशल मीडिया ने पूरी दुनिया में अपना परचम लहराया है। सोशल मीडिया के प्रकार निम्नलिखित हैं
🔍यू-ट्यूब
इण्टरनेट पर गूगल समूह द्वारा संचालित एक वीडियो अपलोड एवं संग्रह स्थल है। यह इण्टरनेट पर गूगल वीडियो के बाद अपने प्रकार का सबसे व्यापक स्थल है। इसकी स्थापना नवम्बर, 2006 में हुई थी। इसमें लाखों वीडियो उपलब्ध हैं। यहाँ प्रसिद्ध टीवी कार्यक्रम, चलचित्र अंश (मूवी क्लिप्स), संगीत, वीडियो, वृत्तचित्र, व्यक्तिगत प्रस्तुतियाँ आदि उपलब्ध होते हैं। इन सभी के भण्डार से अपनी पसन्द के वीडियो चुने जा सकते हैं।
🔍ब्लॉग
'ब्लॉग' वेब-लॉग का संक्षिप्त रूप है, जो अमेरिका में वर्ष 1997 के दौरान इण्टरनेट में प्रचलन में आया। वर्ष 1999 में पीटर मरहोत्ज ने ब्लॉग शब्द का प्रयोग अपनी निजी वेबसाइट पर किया। प्रारम्भ में कुछ ऑनलाइन जर्नल्स के ब्लॉग प्रकाशित किए गए थे, जिसमें इण्टरनेट के भिन्न क्षेत्रों में प्रकाशित समाचार, जानकारी इत्यादि लिंक होते थे तथा ब्लॉग लिखने वालों की संक्षिप्त टिप्पणियाँ भी उनमें होती थीं।
इन्हें ही ब्लॉग कहा जाने लगा। ब्लॉग लिखने वाले, ब्लॉगर कहलाने लगे। प्रायः एक ही विषय से सम्बन्धित आँकड़ों और सूचनाओं का यह संकलन ब्लॉग तेजी से लोकप्रिय होता गया। ब्लॉग लिखने वालों के लिए प्रारम्भिक दिनों में कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी के कुछ विषय, उदाहरण एचटीएमएल भाषा का जानकार होना आवश्यक था, परन्तु इसमें सम्भावनाओं को देखते हुए ब्लॉग लिखने और उसको प्रकाशित करने के लिए कुछ वेबसाइटों ने मुफ्त और अत्यन्त आसान उपकरण उपलब्ध कराए, जिसमें ब्लॉग लिखने के लिए कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाओं का ज्ञान आवश्यक नहीं होता है।
ब्लॉग, विश्व की सभी भाषा में, सभी कल्पनीय विषय में लिखे जाने लगे। ब्लॉग को विश्व के आम लोगों में भारी लोकप्रियता तब मिली, जब अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के दौरान एक अमेरिकी सैनिक ने अपने नित्यप्रति दिन के युद्ध अनुभव को ब्लॉग पर नियमित प्रकाशित किया।
🔍ट्विटर
एक मुक्त सामाजिक नेटवर्किंग और सूक्ष्म ब्लॉगिंग सेवा है, जो उपयोगकर्ताओं को अपनी अद्यतन जानकारियाँ, जो ट्विट्स के रूप में जानी जाती है, एक-दूसरे को भेजने और पढ़ने की सुविधा देता है। ट्विट्स 140 अक्षरों तक के पाठ्य-आधारित पोस्ट हैं, जो लेखक के रूपरेखा पृष्ठ पर प्रदर्शित किए जाते हैं और दूसरे उपयोगकर्ता को भेजे जाते हैं, जो उसके सदस्य हैं।
प्रेषक अपने घेरे के दोस्तों तक वितरण सीमित कर सकते हैं अथवा डिफॉल्ट द्वारा, खुले उपयोग की अनुमति दे सकते हैं, उपयोगकर्ता ट्विटर वेबसाइट या लघु सन्देश सेवा (SMS), या बाह्य अनुप्रयोगों के माध्यम से ट्विट्स भेज सकते हैं और प्राप्त कर सकते हैं। इसकी स्थापना जैक दोर्सेय ने की थी।
🔍फेसबुक
फेसबुक (Facebook) अन्तराल पर स्थित एक सामाजिक नेटवर्किंग की सेवा है। इसका उपयोग निःशुल्क है। यह फेसबुक इंक नामक निजी कम्पनी द्वारा संचालित है। इसके प्रयोक्ता नगर, विद्यालय, कार्य-स्थल या क्षेत्र के अनुसार गठित किए हुए नेटवर्कों में शामिल हो सकते हैं और आपस में विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
अन्य भाषाओं के साथ हिन्दी में भी फेसबुक में काम करने की सुविधा है। फेसबुक की स्थापना हॉवर्ड विश्वविद्यालय के विद्यार्थी मार्क जुकरबर्ग ने की थी।
🔍वाट्सऐप
वाट्सऐप (Whatsapp) आधुनिक मोबाइल फोन (स्मार्ट फोन) पर चलने वाली एक त्वरित मैसेजिंग सेवा (ऐप) है। यह भी एक निःशुल्क सामाजिक प्लेटफॉर्म है जिसके माध्यम से लोग आपस में जुड़ते हैं तथा संप्रेषण की क्रिया संपन्न करते हैं।
इसकी सहायता से इण्टरनेट के द्वारा दूसरे वाट्सऐप उपयोगकर्ता के स्मार्टफोन पर टेक्स्ट सन्देश के अतिरिक्त ऑडियो, फोटो तथा वीडियो को भेजा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि वाट्सऐप की स्थापना वर्ष 2009 में वाट्सऐप इंक द्वारा हुई थी; किन्तु फरवरी, 2014 में फेसबुक ने इसका अधिग्रहण कर लिया।
🔍विकिपीडिया
विकिपीडिया इण्टरनेट आधारित मुक्त विश्वकोष है, जिसे जीएनयू सॉफ्टवेयर लाइसेंस के अन्तर्गत जारी किया गया है। जनवरी 2001 में इसकी पहली सामग्री अंग्रेजी में लिखी गई और इसकी संरचना प्रामाणिक, उपयोगी, परिवर्तनशील तथा पुनर्वितरण के लिए मुक्त तथा बहुभाषी होने के कारण तेजी से लोकप्रिय होती चली गई।
हिन्दी विकिपीडिया जुलाई, 2003 में उपलब्ध हुआ और आज यह विश्व की प्रायः समस्त भाषाओं के लिए उपलब्ध है। वर्तमान समय में सामग्री अनुक्रमों के आधार पर हिन्दी विकिपीडिया का स्थान 100 से अधिक लेखों की सूची वाले देश पर है। जबकि, जाहिर है कि अंग्रेजी 3,47,184 से अधिक लेखों के साथ पहले स्थान पर है।
जन-मीडिया एवं समाज से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य
✅ जनसंचार की वास्तविक शुरुआत भारत में 'प्रिण्ट मीडिया' से मानी जाती है।
✅ गाँधीजी का कथन है कि "पत्रकारिता का उद्देश्य जनसेवा है।"
✅ प्रिण्ट मीडिया के पत्रकार समाज निर्माण के लिए जो त्याग करते हैं. उनसे समाज प्रभावित होता है।
✅ देश की स्वतन्त्रता के समय भारत में 6 रेडियो स्टेशन और 18 ट्रांसमीटर थे।
✅ लेनिन का कथन है- रेडियो बिना कागज और बिना दूरी का समाचार-पत्र है।
✅ दूरदर्शन का पहला प्रसारण 15 सितम्बर, 1959 में दिल्ली से शुरू किया गया था।
✅ वर्ष 1975 में भारत में उपग्रह द्वारा शिक्षा प्रदान करने के लिए उपयोग किया गया। इसे सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरीमेण्ट का नाम दिया गया।
✅ राजा हरिश्चन्द्र पूर्णतः भारतीय फीचर फिल्म थी, जिसके निर्माता धुण्डीराज गोविन्द फाल्के थे। यह फिल्म 3 मई, 1913 को रिलीज हुई थी।
✅ वर्ष 1955 में पांथेर पांचाली के साथ सत्यजीत रे ने यथार्थवादी सिनेमा में एक नई शैली की शुरुआत की।
✅ छोटा परिवार सुखी परिवार जैसे विज्ञापन लोगों को परिवार नियोजन के प्रति सचेत करते हैं।
सोशल मीडिया का समाज पर प्रभाव
सोशल मीडिया के समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को दो रूपों में देखा जा सकता है।
- सकारात्मक प्रभाव तथा
- नकारात्मक प्रभाव।
1. सकारात्मक प्रभाव
सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभावों या लाभों के अन्तर्गत निम्न तथ्यों को शामिल किया जा सकता है
- दोस्तों एवं सगे-सम्बन्धियों से सीधा सम्पर्क
- अभिव्यक्ति की आजादी
- मनोरंजन का साधन
- ज्ञान का भण्डार
- पढ़ाई करने का नया तरीका
- धन कमाने का नया साधन
- बिजनेस/व्यापार बढ़ाने का नया साधन आदि।
2. नकारात्मक प्रभाव/हानि
इसके अन्तर्गत निम्न तथ्यों को शामिल किया जाता है
- लोगों का आदतन (लत लगना) होना
- धन की हानि
- समय की हानि
- यह लोगों को गैर-जिम्मेदार बनाता है।
- झूठ या अफवाह का तीव्र प्रचार-प्रसार, इसके फलस्वरूप समाज में तनाव उत्पन्न होता है।
- समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा इसका दुरुपयोग किया जाना आदि।
संप्रेषण से सम्बन्धित संगठन/संस्थान
Institutions Related to Communication
संप्रेषण से सम्बन्धित संगठन/संस्थान इत्यादि इस प्रकार है
📍सूचना प्रसारण मन्त्रालय
Ministry of Information and Broadcasting
सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय भारत सरकार की एक प्रमुख शाखा है जो सूचना प्रसारण, प्रेस एवं फिल्मों से सम्बन्धित नियम, कानून निर्माण और प्रशासन का शीर्ष निकाय है। यह मन्त्रालय भारत सरकार की प्रमुख प्रसारण शाखा (प्रसार भारती) केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड एवं सूचना प्रभाग का नियमन एवं नियन्त्रण करता है।
मन्त्रालय द्वारा निर्मित नीतियों का उद्देश्य देश में लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ राष्ट्रीय नीति और कार्यक्रमों के प्रति जागरूक बनाना है।
प्रसारण मन्त्रालय के चार प्रभाग होते हैं, सूचना प्रभाग, प्रसारण प्रभाग, फिल्म प्रभाग और एकीकृत प्रभाग।
समाचार-पत्र के कामकाज पर भारतीय प्रेस परिषद् नियन्त्रण रखती है।
सरकार की मीडिया इकाइयों में मुख्य पत्र सूचना कार्यालय, फोटो प्रभाग, समाचार पत्र पंजीयक, प्रकाशन विभाग, गीत व नाटक प्रभाग आदि हैं।
📍प्रसार भारती (Prasar Bharti)
लोगों को शिक्षा, सूचना तथा मनोरंजन प्रदान करने के उद्देश्य से 23 नवम्बर, 1997 को प्रसार भारती का गठन किया गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
प्रसार भारती देश में सार्वजनिक प्रसारण सेवा है। इसके दो मुख्य घटक हैं- आकाशवाणी तथा दूरदर्शन।
इसमें एक अध्यक्ष, एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एक वित्त सदस्य तथा छः अंशकालिक सदस्य होते हैं। इसके अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है।
डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवा का प्रारम्भ प्रसार भारती द्वारा वर्ष 2004 में किया गया।
📍आकाशवाणी (Akashvani)
वर्ष 1927 में मुम्बई तथा कोलकाता में निजी स्वामित्व वाले दो ट्रांसमीटरों से भारतीय प्रसारण सेवा की स्थापना हुई, जिसे वर्ष 1930 में सरकारी स्वामित्व में ले लिया गया।
इस प्रसारण सेवा का नाम वर्ष 1936 में ऑल इण्डिया रेडियो तथा वर्ष 1956 में आकाशवाणी कर दिया गया।
आकाशवाणी 'बहुजन हिताय बहुजन सुखाय' के लक्ष्य पर केन्द्रित होकर कार्य करती है ताकि सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के माध्यम से जनमत के कल्याण को प्रोत्साहन दिया जा सके।
1 अप्रैल, 2004 से आकाशवाणी के 12 केन्द्रों से 'किसान वाणी' कार्यक्रम शुरू किया गया।
एफ.एम. पर 'ज्ञानवाणी' चैनल प्रारम्भ किया गया, जिस पर शास्त्रीय संगीत, कक्षा शिक्षण, विज्ञान व बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कार्यक्रम प्रसारित होते हैं।
स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय देश में 6 आकाशवाणी केन्द्र थे और 11% जनसंख्या तक इनकी पहुँच थी, जबकि वर्तमान में 215 आकाशवाणी केन्द्र हैं, जिनकी पहुँच देश की 99.13% जनसंख्या तक है।
आकाशवाणी विविध भारती, राष्ट्रीय चैनल, एफ. एम. चैनल, प्राथमिक चैनल एवं विदेश प्रसारण चैनल के द्वारा अपनी सेवाएँ प्रदान करता है।
आकाशवाणी का विदेश सेवा प्रभाग भारत और शेष विश्व के बीच सूत्र का कार्य करता है। यह इस समय 100 देशों के लिए 16 विदेशी तथा 11 भारतीय भाषाओं में प्रसारण करता है।
📍दूरदर्शन (Doordarshan)
दरदर्शन का प्रथम प्रसारण 15 सितम्बर 1959 को आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली में किया गया।
वर्ष 1965 में दूरदर्शन पर समाचार बुलेटिन का नियमित प्रसरण शुरू हुआ, जिसकी प्रथम न्यूजरीडर प्रतिभा पुरी बनीं।
रंगीन प्रसारण की शुरुआत वर्ष 1982 में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों के दौरान हुई।
शिक्षा तक सबकी पहुँच कायम करने के उद्देश्य से दूरदर्शन ने 26 जनवरी, 2000 से शैक्षणिक चैनल ज्ञान दर्शन आरम्भ किया।
यह चैनल इग्नू और मानव संसाधन विकास मन्त्रालय के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। यह शिक्षा के प्रति समर्पित भारत का प्रथम चैनल था।
किसानों को कृषि सम्बन्धित आवश्यक जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से 26 मई, 2015 को डी. डी. किसान चैनल की शुरुआत की गई।
📍प्रेस एवं प्रिण्ट मीडिया (Press and Print Media)
वर्ष 1953 में प्रथम प्रेस आयोग की सिफारिश के आधार पर 1 जुलाई, 1956 को भारत के समाचार पत्र पंजीयक या प्रेस पंजीयक का कार्यालय अस्तित्व में आया।
दिल्ली में 11 भाषाओं में पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हुआ। इसके बाद महाराष्ट्र में 10 भाषाओं में, केरल तथा कर्नाटक में 9-9 भाषाओं में तथा पश्चिम बंगाल में 7 भाषाओं में प्रकाशन हुआ।
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक समाचार पत्रों का पंजीकरण हुआ। महाराष्ट्र से प्रकाशित हो रहा 'बॉम्बे समाचार' देश का सबसे पुराना अखबार है।
प्रतिवर्ष 16 नवम्बर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है।
📍पत्र सूचना कार्यालय (Press Information Bureau)
पत्र सूचना कार्यालय सरकार की नीतियों, कार्यक्रम पहल और उपलब्धियों के बारे में समाचार पत्रों तथा इलैक्ट्रॉनिक मीडिया को सूचना देने वाली प्रमुख एजेन्सी है।
यह प्रेस विज्ञप्तियों, प्रेस नोट, विशेष लेखों, सन्दर्भ सामग्री, प्रेस ब्रीफिंग आदि को संवाददाता सम्मेलन, साक्षात्कार, प्रेस दौरे और कार्यालय की बेवसाइट के माध्यम से सूचना को सर्वत्र पहुँचाता है।
इसके क्षेत्रीय तथा शाखा कार्यालय, अपने क्षेत्र में केन्द्र सरकार के सभी कार्यालयों के लिए प्रमुख सूचना कार्यालय के रूप में कार्य करते हैं।
📍फिल्म विभाग (Film Institution)
वर्ष 1943 में स्थापित 'इण्डियन न्यू परेड तथा इन्फॉर्मेशन फिल्म्स् ऑफ इण्डिया' का पुनः नामकरण कर जनवरी, 1984 में फिल्म विभाग का गठन किया गया।
सिनेमाटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत केन्द्रीय चलचित्र प्रमाणन बोर्ड, भारत में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों का प्रमाणन करता है।
भारतीय बाल फिल्म समिति की स्थापना वर्ष 1955 में बच्चों को फिल्मों से उच्च आदर्शों की प्रेरणा देने वाला मनोरंजन प्रदान करने के उद्देश्य से की गई।
राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार, पुणे की स्थापना वर्ष 1964 में सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय के अधीन एक स्वतन्त्र मीडिया इकाई के रूप में की गई।
राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। जबकि वर्ष 1988 में भारतीय चलचित्र निर्यात निगम और फिल्म वित्त निगम के विलय के बाद इसका पुनर्गठन किया गया। इस निगम का उद्देश्य भारत में सिनेमा की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा श्रव्य दृश्य एवं सम्बन्धित क्षेत्रों में अति आधुनिक प्रौद्योगिकी विकसित करना है।
📍समाचार एजेन्सियाँ (News Agencies)
भारत की समाचार एजेन्सियों का विवरण निम्न प्रकार है
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इण्डिया
यह भारत की सबसे बड़ी एजेन्सी है, जो बिना किसी लाभ के चलाई जाने वाली सहकारी संस्था है। इसकी स्थापना 27 अगस्त, 1947 को हुई तथा 1 फरवरी, 1949 से इसने अपनी सेवाएँ प्रारम्भ कर दीं।
यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इण्डिया
इसकी स्थापना वर्ष 1956 के कम्पनी कानून के तहत 19 दिसम्बर, 1959 को हुई। वर्ष 1982 में इसने पूर्ण रूप से हिन्दी तार सेवा 'यूनिवार्ता' का आरम्भकिया, जो भारत की पहली हिन्दी समाचार एजेन्सी बन गई। यू.एन.आई. विश्व की सबसे बड़ी सूचना कम्पनी रायटर के माध्यम से विश्व के समाचार वितरित करती है।
गुटनिरपेक्ष समाचार एजेन्सी पूल
यह गुटनिरपेक्ष देशों की समाचार एजेन्सियों के बीच समाचार आदान-प्रदान करने की व्यवस्था थी। यह वर्ष 1976 में शुरू हुई। पूल के समाचार चार भाषाओं में प्रेषित किए जाते हैं- अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच और अरबी।
भारतीय प्रेस परिषद्
इसकी स्थापना समाचार पत्रों की स्वतन्त्रता की रक्षा करने और भारत में समाचार पत्रों और समाचार एजेन्सियों के स्तर को बनाए रखने और इसमें सुधार लाने के उद्देश्य से संसद के एक अधिनियम के तहत की गई। इस परिषद् के अध्यक्ष भारत के उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होते हैं। परिषद की आय के अपने स्रोत हैं। यह पंजीकृत समाचार-पत्रों और समाचार एजेन्सियों से शुल्क वसूल करती है।
जन-मीडिया एवं समाज से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोउत्तर
प्रश्न 1. मीडिया जब तक जनता को साथ लेकर नहीं चलेगी तब तक जनता भी उसका साथ नहीं देगी किसका कथन है :
- प्रभाष जोशी
- मनोहर श्याम जोशी
- रवीश कुमार
- ओम थानवी
उत्तर - 1. प्रभाष जोशी
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से जनसंचार के कार्यों में शामिल नहीं है :
- सूचना देना
- शिक्षित करना
- मनोरंजन करना
- अफवाह फैलाना
उत्तर - 4. अफवाह फैलाना
- रेडियो
- टेलीविजन
- सिनेमा
- नाटक
उत्तर - 4. नाटक
- प्रिंट मीडिया
- रेडियो
- टेलीविजन
- इंटरनेट
उत्तर - 1. प्रिंट मीडिया
- 1936
- 1949
- 1969
- 1982
उत्तर - 1. 1936
- समाचार पत्र
- रेडियो
- टेलीविजन
- इंटरनेट
उत्तर - 4. इंटरनेट
- तथ्यों की शुद्धता
- वस्तुपरकता
- पक्षधरता
- संतुलन
उत्तर - 3. पक्षधरता
- प्रिंट मीडिया
- रेडियो
- टेलीविजन
- इंटरनेट
उत्तर - 1. प्रिंट मीडिया
- प्रिंट माध्यम
- रेडियो
- टेलीविजन
- इंटरनेट
उत्तर - 1. प्रिंट माध्यम
- आपके पास पर्याप्त जानकारी हो
- इसके बारे में स्पष्टता हो
- रिकॉर्ड करना संभव हो
- उपर्युक्त सभी
उत्तर - 4. उपर्युक्त सभी
- मंत्रालय के सूत्र
- प्रेस कॉन्फ्रेंस
- विज्ञप्ति
- उपर्युक्त सभी।
उत्तर - 4. उपर्युक्त सभी
- प्रिंट माध्यम – श्रव्य माध्यम
- रेडियो – श्रव्य माध्यम
- टेलीविजन – श्रव्य-दृश्य माध्यम
- टेपरिकार्डर - श्रव्य माध्यम
उत्तर - 1. प्रिंट माध्यम – श्रव्य माध्यम


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